क्यों नहीं होता है दावा
ताहिर अली ने बताया कि अक्सर इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में नॉमिनी को पता ही नहीं होता है। या फिर पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं मिलते हैं। इस तरह पॉलिसीधारक की मौत होने पर आश्रित इस रकम पर दावा करने की स्थिति में नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नॉमिनी को न केवल पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, बल्कि उसे यह जानकारी भी होनी चाहिए कि पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज कहां रखे हैं।
पॉलिसी में नॉमिनेशन को अपडेट कराना भी नहीं भूलना चाहिए। चेक के पेमेंट के साथ तय समय जुड़ा होता है। इसके गलत रखरखाव से भुगतान में देरी हो सकती है। ज्यादातर बीमा कंपनियों ने क्लेम के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू कर दी है। 2014 के बाद जारी पॉलिसी में बीमा कंपनियां फंडों के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर पर जोर देती हैं। ऐसे में इसके लिए आवेदन के समय ही ब्लैंक कैंसिल चेक ले लेती हैं।