मंगलवार को उगते सूर्य को सुबह 06:25 बजे अर्घ्य दिया जाएगा।महिलाओं ने रविवार को घरों में छठ माता के गीतों के साथ ही पर्व की तैयारी की। इस दौरान ‘कांच ही बांस के बहंगिया... बहंगी लचकत जाय’ जैसे छठ गीत भी गूंजते रहे।
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छठ महापर्व के दुसरे दिन खरना करतीं महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छठ महापर्व को लेकर पर्व के दूसरे दिन रविवार को महिलाओं ने खरना किया। दिन भर व्रत रहकर शाम को पूजा-अर्चना कर गुड़ की खीर व रोटी ग्रहण किया। इसके बाद घर वालों ने इसे प्रसाद के रूप में खाया। इसके बाद से ही 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू हो गया।
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घर में ठेकुआ बनातीं महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य शाम को 05:35 बजे व्रती महिलाएं छठ घाट पर देंगी। मंगलवार को उगते सूर्य को सुबह 06:25 बजे अर्घ्य दिया जाएगा।महिलाओं ने रविवार को घरों में छठ माता के गीतों के साथ ही पर्व की तैयारी की। इस दौरान ‘कांच ही बांस के बहंगिया... बहंगी लचकत जाय’ जैसे छठ गीत भी गूंजते रहे।
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छठ घाट की तैयारी पूरी कर ली गई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घरों में मिट्टी का चूल्हा बनाकर इस पर प्रसाद बनाया गया। पूरा दिन महिलाओंं ने तैयारियों में बिताया। इसके साथ ही बाजारों से खरीदारी कर लाए गए विभिन्न प्रकार के फलों को धुल कर उसे टोकरी में रखा गया व देर रात तक इसे दउरे व सूपे में सजा दिया गया।
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घाट पर तैयारी के दौरान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोमवार को शाम को सोलह श्रृंगार कर मंगल गीत गाते हुए व्रती महिलाएं छठ घाट पहुुंचेंगी। दउरा में विभिन्न प्रकार के फल रखकर सिर पर उठाकर नंगे पैर परिवार के लोग नदी, तालाब व कृत्रिम घाट पहुंचेंगे। वहां महिलाएं घाट पर बनी बेदी पर छठ माता की पूजा-अर्चना कर संतान की दीर्घायु के लिए कामना करेंगी।
शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। रात में कोसी भरने की परंपरा का भी निर्वहन किया जाएगा। इसके अगले दिन मंगलवार को भोर से ही महिलाएं मंगल गीत गाते हुए छठ घाठ पहुंचेंगी। वहां छठ माता की पूजा-अर्चना के बाद उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि इस व्रत की महिमा अपरंपार है। व्रत करने से छठ माता की कृपा बनी रहती है।