शव को लेकर जाती पुलिस।
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मंगलवार सुबह जब मान्या, मानवी और जीतेंद्र की आत्महत्या की खबर शहर में फैली तो सभी हतप्रभ रह गए। तमाम समाजों और संस्थाओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। ज्यादातर का कहना था कि जीतेंद्र ने अपनी पीड़ा साझा की होती तो उनकी सहायता की जाती। लेकिन, तीनों के अंतिम संस्कार के लिए कोई समाज, कोई संस्था सामने न आई।