भीषण गर्मी से राहत पाने को चेहरे पर पानी डालती युवती।
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कृषि विज्ञानियों का कहना है कि औसत से कम बारिश का असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। पहले तो धान की नर्सरी का जमाव कम हुआ है। उसके बाद धान की रोपाई समय से नहीं हो पा रही है। इसके अलावा दूसरी अन्य फसलों की भी बिजाई नहीं हो पा रही है। वहीं, यदि कोई किसान धान की रोपाई कर भी दे रहा है, तो उसे सिंचाई महंगी पड़ रही है। दूसरी फसलों को लेकर भी किसान चिंतित हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि रूठे मानसून को कैसे मनाएं? वहीं, कम बारिश होने से तापमान में गिरावट नहीं आ रही है। उमस भरी गर्मी का प्रकोप जारी है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अधिक बिजली का उपभोग कर रहे हैं। अधिक एसी चलने से पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है।