जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ के पास रोजाना 20 से 25 युवा पहुंच रहे हैं। ऐसे में इस माह अब तक 2200 से अधिक मरीज पहुंच चुके हैं। इन युवाओं को हृदय रोग का खतरा सबसे अधिक है। डॉक्टर का कहना है कि दो साल पहले 15 दिनों में 1-2 केस युवाओं के हार्ड-अटैक के आते थे। लोकिन अब संख्या बढ़ गई है।
इस बार कड़ाके की ठंड से पहले हल्की सर्द में ही अस्पतालों में दिल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पिछले साल की तुलना में करीब 30 फीसदी ज्यादा मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इसमें युवाओं की संख्या अधिक है। 30 से 35 साल के युवाओं की संख्या 20 से 25 फीसदी है।
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग की ओपीडी में पिछले महीने करीब 1800 के आसपास मरीज दिल से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचे थे। लेकिन, इस माह अब तक 2200 से अधिक मरीज पहुंच चुके हैं। इन मरीजों में 20 से 25 फीसदी युवा हैं, जिनमें बीपी, हाइपरटेंशन, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड ग्लूकोज के साथ-साथ हृदय रोग से जुड़ी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
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विशेषज्ञ डॉ. रोहित गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला।
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि हल्की ठंड में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। इनमें बुजुर्गों के साथ अधेड़ और युवा भी शामिल हैं। युवाओं में सबसे अधिक दिक्कत है। इसकी वजह यह है कि युवाओं की लाइफ स्टाइल में बदलाव हुआ है। स्मोकिंग से लेकर शराब का सेवन और जंक फूड उनके हृदय के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। यही कारण है कि हार्टअटैक के मामले भी युवाओं में बढ़े हैं, जबकि दो साल पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : पेक्सेल्स
हर सप्ताह चार से छह युवा हो रहे हार्ट अटैक का शिकार
डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि दो साल पहले तक 15 दिनों में एक दो केस युवाओं के हार्ट-अटैक के आते थे। लेकिन, अब यह संख्या अचानक बढ़ गई है। हर सप्ताह चार से छह युवा हार्ट-अटैक के शिकार होकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। इन युवाओं से जब बातचीत की गई तो पता चला कि यह लोग स्मोकिंग के साथ शराब का सेवन भी करते हैं। साथ ही खुद को फिट रखने के लिए जिम का सहारा भी लेते हैं। लेकिन, इनके खान-पान की वजह से इनकी धमनियों में रक्त के प्रवाह कम हो रहे थे। ऐसे में उन्हें सलाह दी गई कि जिम के साथ खानपान बेहतर रखें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोविड की वजह से दिक्कतें हैं या नहीं, शोध का विषय
डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि इस बार कड़ाके की ठंड से पहले मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें बुजुर्ग के साथ युवा भी शामिल हैं। इसके पीछे कोविड का प्रभाव या नहीं। यह बता पाना मुश्किल है। यह शोध का विषय है। लेकिन, इसके पीछे कुछ और कारण हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कोविड के बीच शुगर और बीपी के मरीजों ने लापरवाही ज्यादा बरती है। टहलने की आदत लोगों ने छोड़ दी थी। साथ अपनों के जाने का दर्द, आर्थिक तंगी जैसे कई कारण तनाव के हो सकते हैं। ये कारण कहीं न कहीं दिल को कमजोर कर रहे हैं।