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Captain Varun singh: ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को बचपन से था हवाओं में उड़ने का शौक, दोस्तों ने बताई ये बात

Wed, 15 Dec 2021 08:53 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

रुद्रपुर के लाल और शौर्य चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह आठ दिसंबर को कुन्नूर में हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल हुए थे।
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ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
देवरिया जिले के कन्हौली गांव निवासी ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के निधन की सूचना मिलने के बाद जिले के लोग शोक में डूब गए। जिले के इस लाल का अंतिम संस्कार मध्य प्रदेश के भोपाल में शुक्रवार को होगा। गांव के लोगों को शहीद का अंतिम दर्शन नहीं कर पाने का मलाल है।

रुद्रपुर के लाल और शौर्य चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह आठ दिसंबर को कुन्नूर में हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल हुए थे। परिवार वालों का कहना है कि उन्हें वैलिंगटन के सेना अस्पताल से बंगलुरू शिफ्ट किया गया था। सेना के डॉक्टर उन्हें बचाने की जी जान से कोशिश कर रहे थे। सात दिनों के इलाज में छह बार सर्जरी हुई। वरुण के झुलसे शरीर पर स्क्रीन ग्रॉफ्टिंग का डॉक्टर टेस्ट कर रहे थे। उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर रक्त, मज्जा और प्लेटलेट्स चढ़ाया जा रहा था।
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ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के घर पर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
इधर वरुण की जान बचाने के लिए गांव एवं पूरे इलाके में प्रार्थनाएं की जा रही थीं। पैत्रिक गांव सहित देवरिया जिले के मठ-मंदिरों में जप, अनुष्ठान चल रहा था। मस्जिद और गिरजाघरों में देवरिया की धरती के बहादुर बेटे की जान बचाने के लिए प्रार्थना की गई थी। कन्हौली में सात दिनों से गांव वाले वीर सपूत की प्राण की रक्षा के लिए रुद्राभिषेक कर रहे थे। बुधवार दोपहर को ग्रुप कैप्टन वरुण के नहीं रहने की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया। उनके पैतृक गांव कन्हौली में भीड़ उमड़ पड़ी। शहीद वरुण के गांव लोग पहुंचने लगे। उसी दौरान उनके चाचा अधिवक्ता दिनेश प्रताप सिंह के पास कॉल आई।

 
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ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
बताया गया कि पार्थिव शरीर बंगलुरु के सेना अस्पताल में है, अंतिम संस्कार भोपाल में होगा। उधर शहीद के चाचा व पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि वरुण सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल होने परिवार के सभी सदस्य भोपाल पहुंच रहे हैं। परिवार के कई सदस्य विदेश में हैं। वे लोग बृहस्पतिवार को भोपाल पहुंच जाएंगे। शहीद का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को सेना की जहाज से भोपाल पहुंचेगा। वहां शुक्रवार को अंतिम संस्कार होगा।

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के साथ बिताए गए पलों को याद कर उनके गांव के हमजोली मित्र पहले तो फफक पड़े, फिर संभल कर उनके शौर्य पर अभिमान जताते हुए कहने लगे, वह कभी मर नहीं सकते। उनकी यादों में शहीद वरुण अमर रहेंगे।


 

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भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की सलामती के लिए लोग दुआ मांग रहे थे। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
गांव में छुट्टी पर प्रवास के दौरान उनके साथ काफी समय बिताने वाले रूपेश सिंह कहते हैं कि पूरे गांव को अपने वीर सपूत पर नाज है। वह यारों के यार थे। गांव आने पर उन्होंने कभी एहसास नहीं होने दिया कि वह इतने बड़े पायलट और सेना के अधिकारी हैं। सबसे बहुत सरलता से मिलना-जुलना होता था।

चतुर्भुज सिंह ने कहा कि वरुण को बचपन से ही हवा में उड़ने का शौक था। उन्होंने सेना के स्कूल में ही शिक्षा के दौरान ही फाइटर पायलट बनकर देश की सेवा का जज्बा देखा था। गोरखपुर में तैनाती के दौरान वह जगुआर उड़ाते समय अकसर गांव के ऊपर से गुजरते और लैडिंग के बाद फोन पर साथियों से बात करते।

 
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ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह अपने परिवार के साथ। (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
रामप्रताप सिंह ने कहा कि वरुण पर पूरे देश को नाज है। उन्होंने कन्हौली गांव की माटी को धन्य कर दिया। गांव के बेटे ने देश के लिए बलिदान दिया है। उनके शौर्य च्रक से नवाजे जाने के बाद पूरा गांव जश्न में डूब गया था। आज इस गांव के शौर्य का अस्त हो गया। वरुण के बलिदान पर इस माटी को सदा गर्व रहेगा।

शहीद के चाचा राजीव सिंह ने कहा कि बलिदानी वरुण परिवार के लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ कर चले गए। उनके साथ बीता एक-एक पल कचोट रहा है। वह अत्यंत शिष्टाचारी थे। गांव के लोग उनके व्यवहार को कभी भूल नहीं सकते। गांव आने के बाद वह सबसे बड़े गर्मजोशी से मिलते रहे। मुल्लन सिंह ने कहा कि वरुण कन्हौली के कोहिनूर थे। वह ऐसा हीरा थे, जिसने पूरे देश में चमक बिखेरकर क्षेत्र वासियों को माटी पर गर्व करने का अवसर दिया।

 
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