फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: दरवाजा लॉक न पिस्टल की मैगजीन से बुलेट निकाली, खुदकुशी या फिर हादसा?; अंबरीश की मौत में कई सवाल अनसुलझे

Sat, 25 Apr 2026 03:31 PM IST
Sharukh Khan रोहित सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

गोरखपुर शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी अंबरीश श्रीवास्तव की मौत के बाद से परिवार के साथ ही तमाम घरों में मातम है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव शाम चार बजे आवास पर लाया गया तो वहां मौजूद परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। 
विज्ञापन
1 of 15
मृतक के अंबरीश की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी अंबरीश श्रीवास्तव की मौत के बाद पहले सुसाइड और फिर पिस्टल साफ करने के दौरान गोली लगने की बात कही गई। हालांकि फॉरेंसिक टीम और पुलिस टीम कई उलझे सवालों को जवाब तलाशने में जुटी है। घटना के दौरान की परिस्थितियां कई तरह के सवाल उठा रही हैं। लंबे समय से पिस्टल रखते आ रहे अंबरीश क्या मैगजीन से बिना बुलेट निकाले पिस्टल साफ कर रहे थे और घटना के बाद दरवाजा भी खुला मिला। ये दोनों सवाल जांच टीम को परेशान कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक अंबरीश कुसम्ही वाले फार्म हाउस पर हफ्ते या 10 दिन में कभी एक या आधे घंटे के लिए जाते थे। शुक्रवार को सुबह लगभग नौ बजे के करीब वह फार्म हाउस पहुंचे और सीधे ऊपर की मंजिल पर चले गए। पंद्रह-बीस मिनट बाद तक जब कोई छत पर नहीं गया तो फार्म हाउस के मैनेजर ने ही वहां के कर्मचारियों को फोन करके डांटा कि, मालिक आए हुए हैं और किसी ने पानी तक नहीं पूछा? इसी के बाद एक कर्मचारी छत पर पानी लेकर पहुंचा, तब तक अंबरीश की मौत हो चुकी थी। कर्मचारी की सूचना पर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
 
विज्ञापन

2 of 15
घर के बाहर जुटी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि अंबरीश के मुंह में गोली लगी हुई थी और पिस्टल दाएं हाथ की तरफ गिरी हुई थी। जांच में पता चला कि, अंबरीश दाहिने हाथ से ही अपना सारा काम करते थे। फॉरेंसिक टीम के मुताबिक अगर कोई फायरिंग करता है तो उसकी हथेली में गन पाउडर चिपक जाता है। बंदूक की नली और अन्य हिस्सों से निकलने वाली गर्म गैस और धुआं और गन पाउडर के कण गोली चलाने वाले के हाथों, बांहों और कपड़ों पर जमा हो जाते हैं। इससे बताया जा सकता है कि फायरिंग किसने की। फॉरेंसिक टीम ने दोनों हाथों से गन पाउडर का सैंपल लिया है। क्योंकि किसी भी सूरत में अगर अंबरीश के हाथ से फायरिंग हुई तो गन पाउडर के कण जरूर मिलेंगे।
विज्ञापन

3 of 15
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर गोली चलने के दौरान दरवाजा खुला हुआ था तो किसी ने फायर होने पर आवाज क्यों नहीं सुनी? अंबरीश किस हाथ से अपने काम करते थे, इसकी भी जांच की जाएगी, इससे पिस्टल रखने, गोली लगने और फायरिंग के बाद मौके पर मिली पिस्टल से परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

 

4 of 15
घर पर जुटी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कितनी दूर से चली गोली इसकी भी हो रही जांच
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक बंदूक से निकली गोली दो घाव बनाती है। पहला एंट्री और दूसरा एक्जिट का। ऐसे में गोली चली तो शरीर के बाहर निकली या नहीं यह देखा जाता है। सूत्रों के मुताबिक अंबरीश को लगी गोली बाहर निकल गई थी। ऐसे में फोर्स और रेंज की भी जांच जांच की जा रही है कि कितनी दूरी से फायरिंग पर गोली आसानी से मुंह में लगने के बाद बाहर निकल सकती है? अगर गोली निकली भी तो शरीर से कितनी दूरी पर कारतूस मिला।
 
विज्ञापन

5 of 15
घटनास्थल पर जुटे शुभचिंतक और एसएसपी मौके पर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिस्टल की सफाई में मुंह में गोली लगने पर भी सवाल
फॉरेंसिक विशेषज्ञ और अंबरीश को जानने वाले पिस्टल साफ करने के दौरान गोली लगने की बात से सहमत नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना है कि लाइसेंस बहुत पुराना था। ऐसे में अंबरीश पहले भी पिस्टल साफ करते रहे होंगे। पहले से अनुभव होने के बाद भी किसी नौसिखिए की तरह मैगजीन खाली किए वह क्यों पिस्टल साफ करेंगे। फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक अमूमन खुदकुशी के समय लोग दरवाजा बंद रखते हैं जबकि अंबरीश की मौत के बाद दरवाजा खुला हुआ था, इसे भी ध्यान में रखकर पुलिस टीम जांच कर रही है।


 
विज्ञापन

6 of 15
घटना स्थल पर जांच करती फॉरेंसिक की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मासूम के जज्बात देख हर आंख नम
अंबरीश श्रीवास्तव के निधन से परिवार के साथ ही तमाम घरों में मातम है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव शाम चार बजे आवास पर लाया गया तो वहां मौजूद परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। अंबरीश का बड़ा बेटा ईशान (करीब आठ साल) मां दीपाली को सहारा देते हुए ढांढस बंधाता रहा। आंखों में आंसू लिए बेटे को मां को सहारा देता देख वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा।

 
विज्ञापन

7 of 15
घर पर शव पहुंचने के बाद जुटी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटे का शव देखकर बुजुर्ग पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। छोटे भाई नितिन और दोनों बेटे पिता के शव से लिपटकर रोने लगे। अंबरीश का छोटा बेटा वीर (करीब पांच साल) चाचा नितिन से लिपटकर सिसकता रहा। भतीजे को इस तरह बिलखते देख नितिन भी खुद को संभाल नहीं पाए और उसे सीने से लगाकर रोने लगे। अंतिम संस्कार के लिए शव जब राजघाट ले जाया जाने लगा उस समय अंतिम दर्शन के दौरान एक और बेहद भावुक क्षण सामने आया। 

 

8 of 15
अंबरीश का घर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंबरीश की पत्नी दीपाली, अपनी ननद पारूल श्रीवास्तव (जो अहमदाबाद से आई थीं) से लिपटकर रोते हुए बार-बार यही कहती रहीं कि अब उनका और बच्चों का क्या होगा। इस बीच बड़ा बेटा ईशान सिसकते हुए मां को सहारा देता रहा। छोटा बेटा अपने चाचा से लिपटकर बार-बार पूछता रहा कि पापा को क्या हुआ, उन्हें उठाइए न चाचा।

 

9 of 15
पिता ने हाथ जोड़कर अंबरीश को दी अंतिम विदाई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, अंबरीश की शहर में एक अलग पहचान थी। सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर बड़े आयोजनों तक उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। उनकी मौत की सूचना के बाद पार्क रोड स्थित आवास पर सुबह से ही लोगों का तांता लगा हुआ था। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि, छात्रनेता और परिचितों के साथ सैकड़ों लोग अंबरीश को अंतिम विदाई देने पहुंचने लगे थे। भीड़ को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा। शाम करीब 5:30 बजे अंबरीश का पार्थिव शरीर राजघाट ले जाया गया जहां छोटे भाई नितिन श्रीवास्तव ने उन्हें मुखाग्नि दी।
 

10 of 15
अंबरीश के पार्थिव शरीर के पास बेटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता के लब खामोश, आंखें छलकती रहीं
गोरखपुर क्लब सभागार के संचालक अंबरीश श्रीवास्तव की मौत से परिवार ही नहीं उनके शुभचिंतक भी सदमे में हैं। हमेशा अलर्ट रहने वाले अंबरीश को गोली कैसे लगी...यह बातें पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही। उधर, अपने कमरे में बैठे पिता अतुल श्रीवास्तव पूरे दिन खामोश रहे। उनके मोबाइल पर रिश्तेदारों के फोन भी आए तो बस इतना ही कहा...जो सुना है सही है। कुछ लोगों ने वजह पूछी तो होंठ नहीं खुले, आंखें छलक उठीं।

 

11 of 15
शव के पास रोते बिलखते पत्नी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अपने पिता की ही तरह अंबरीश भी हरदिल अजीज थे। उनके जानने वालों का कहना है कि बेहद ही सरल और मिलनसार स्वभाव के थे। हर किसी का सम्मान करना उनके स्वभाव में था। उनकी मौत की खबर जिसे भी मिली सहसा यकीन नहीं कर सका। परिजनों के मुताबिक अंबरीश बृहस्पतिवार की देर रात शहर पहुंचे थे और तारामंडल स्थित अपने होटल में भोजन के बाद पार्क रोड स्थित अपने आवास पर आए थे।

 

12 of 15
रोते बिलखते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शुक्रवार को दोपहर करीब एक बजे अपने कमरे में बैठे पिता अतुल श्रीवास्तव बेहद गुमसुम थे। जो लोग भी मिलने आ रहे थे उन्हें इशारे से बैठने को कह रहे थे। उनके कुछ परिचितों ने पूछा-कैसे हो गया यह सब, इस पर बोले-कुछ पता नहींं। इतना कहते ही उनकी आंखें नम हो गईं। कुछ देर तक सोचते रहे फिर उठे और भीतर चले गए।

13 of 15
मृतक अंबरीश की पत्नी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंबरीश के निधन पर सीएम योगी ने जताया शोक
चित्रगुप्त मंदिर सभा के मंत्री एवं सिविल लाइंस स्थित पार्क रोड निवासी अंबरीश श्रीवास्तव के आकस्मिक निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक जताया है।

 

14 of 15
फॉरेंसिक की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंबरीश के पिता अजय कुमार श्रीवास्तव (अतुल) को भेजे गए संवेदना पत्र में सीएम ने कहा है कि पुत्र का निधन किसी भी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति एवं पीड़ादायक होता है। मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरक्षनाथ से दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करने व शोक संतृप्त परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने में शक्ति देने की प्रार्थना की है।

 
विज्ञापन

15 of 15
मृतक अंबरीश की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इधर, चित्रगुप्त मंदिर सभा के अध्यक्ष राजेश चंद्रा ने कायस्थ समाज के लिए इसे अपूरणीय क्षति बताया। कहा कि बेहद कम उम्र में अंबरीश श्रीवास्तव ने समाज और व्यवसाय में अपनी अलग पहचान बनाई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें