घट्नास्थल पर पहुंची पुलिस व ग्रामीणों की जुटी भीड़।(इनसेट में अधिवक्ता की फाइल फोटो)
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गोली लगने के बाद जमीन पर तड़प रहे राजेश्वर की आखिरी सांस चल रही थी पर उनका जज्बा जिंदा था। बेटी! मुझे कुछ नहीं होगा। तुम लोग रो क्यों रहे हो। अस्पताल ले चलो, सब ठीक हो जाएगा...। यह बोल अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय की जिंदगी के आखिरी शब्द थे। इसके बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। फिर क्या घर में कोहराम मच गया। एक बाप का अपनी बेटी के हाथ पीले करना का सपना अधूरा रह गया।