गोरखनाथ मंदिर में चल रहे खिचड़ी मेला को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। बाबा के चरणों में श्रद्धा निवेदित करने के बाद बच्चों से लेकर बड़ों तक मेला में चटपटे पकवानों के साथ-साथ टोराटोरा, सोलंबो और ब्रेक डांस झूले और मौत का कुआं का भीषण ठंड में भी जमकर आनंद ले रहे हैं।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
युवाओं का ब्रेक डांस झूले के प्रति विशेष आकर्षण है। ड्रेगन झूले के प्रति भी बच्चों का खासा आकर्षण देखने को मिल रहा है। ऑटोमेटिक सर्कस में लगे सीसों में अपनी बिगड़ी आकृति जहां लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है। वहीं मौत का कुआं रोमांच में तड़का लगा रहा है।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
नकली फूल और स्टाइलिश बाइक के साथ फोटो लेने का क्रेज
मोबाइल में भले ही फोटो खींचने की व्यवस्था है लेकिन मेले में लगे अस्थायी स्टूडियो में फोटो खिंचवाने वालों की संख्या में कमी नहीं आई है। कोई नकली फूलों की ओट में फोटो खिंचा रहा है तो कोई पुरानी स्टाइलिश बाइक पर बैठकर अपनी साध पूरी कर रहा है। कहने का मतलब मेले और फोटो स्टूडियो का रिश्ता बदस्तूर कायम है।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
खूब हुई खरीदारी
लोगों ने मेले में लगी दुकानों में जमकर खरीदारी की। सबसे अधिक भीड़ घर-गृहस्थी के सामान की दुकानों पर दिखी। वहीं सजावट के सामान, खिलौने आदि की खरीदारी करते हुए भी लोग नजर आए।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
गौरतलब है कि कई दिनों से कड़ाके की ठंड के बाद धूप और छुट्टी के दिन की वजह से रविवार को गोरखनाथ मंदिर में लगे खिचड़ी मेले की रौनक बढ़ गई। गोरखनाथ मंदिर में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पहले लोगों ने बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई, इसके बाद मेले का आनंद लिया।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व एक महीने तक मनाया जाता है। इस दौरान दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर मेले का आनंद ले रहे हैं।
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गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर्व पर खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा युगों से से चली आ रही है। खिचड़ी के बाद पड़ने वाले बुढ़वा मंगल जो 26 जनवरी को मनाया जाएगा, उस दिन भी मंदिर में फिर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होगी।
बुढ़वा मंगल के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा को खिचड़ी चढ़ाते हैं। उस दिन का नजारा भी मकर संक्रांति के दिन के जैसा ही होता है। ऐसी मान्यता है कि बुढ़वा मंगल को खिचड़ी चढ़ाने का महत्व मकर संक्रांति जैसा ही होता है। इस दिन खिचड़ी चढ़ाने वालों में ज्यादातर शहर के लोग होते हैं।