फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ram Prasad Bismil Birthday: फांसी से पहले भावुक हुए थे बिस्मिल, मां से बोले- मौत से नहीं, तुमसे बिछड़ने का है डर

Sat, 11 Jun 2022 10:55 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल स्मारक का ताला आम लोगों के लिए खोल दिया गया। - फोटो : अमर उजाला।
काकोरी कांड के महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की आज 125वीं जयंती मनाई जा रही है। आज हम इनकी खास कहानी बताने जा रहे हैं। गोरखपुर में बिस्मिल की एक अलग पहचान है। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी चार महीने और दस दिन गोरखपुर जिला जेल में बिताए थे। चौरीचौरा कांड के बाद कांग्रेस ने अचानक असहयोग आंदोलन वापस ले लिया गया। इसके कारण बिस्मिल का इनसे मोहभंग हो गया था। इसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर 'आजाद' के नेतृत्व वाले हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ गोरों के सशस्त्र प्रतिरोध का नया दौर आरंभ किया लेकिन सवाल था कि इस प्रतिरोध के लिए शस्त्र खरीदने को धन कहां से आए? इसी का जवाब देते हुए उन्होंने नौ अगस्त 1925 को अपने साथियों के साथ एक ऑपरेशन को अंजाम दिया। उन्होंने काकोरी में ट्रेन से ले जाया जा रहा सरकारी खजाने को लूट लिया।

 
विज्ञापन

2 of 5
राम प्रसाद बिस्मिल के अंतिम शब्द। - फोटो : अमर उजाला
इसके थोड़े ही दिनों बाद 26 सितंबर, 1925 को पकड़ लिए गए और लखनऊ की सेंट्रल जेल की 11 नंबर की बैरक में रखे गए। मुकदमे के नाटक के बाद अशफाक उल्लाह खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रौशन सिंह के साथ उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई।

 
विज्ञापन

3 of 5
राम प्रसाद बिस्मिल अंतिम दिनों में इसी जगह पर बंदी रहे। - फोटो : अमर उजाला
मौत के डर से नहीं मां, तुमसे बिछड़ने के शोक में आए हैं आंसू
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की माता मूलरानी ऐसी वीरमाता थीं जिनसे वे हमेशा प्रेरणा लेते थे। शहादत से पहले वह रामप्रसाद बिस्मिल से मिलने गोरखपुर जेल पहुंचीं तो पंडित बिस्मिल की आंखें डबडबाई गईं और वह मां से लिपटकर भावुक हो गए।

 

4 of 5
राम प्रसाद बिस्मिल को इसी जगह दी गई थी फांसी। - फोटो : अमर उजाला
 मां ने कलेजे पर पत्थर रख लिया और उलाहना देती हुई बोलीं, 'अरे, मैं तो समझती थी कि मेरा बेटा बहुत बहादुर है और उसके नाम से अंग्रेज सरकार भी थरथराती है। मुझे पता नहीं था कि वह मौत से इतना डरता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
राम प्रसाद बिस्मिल - फोटो : अमर उजाला।
 उनसे पूछने लगीं, 'तुझे ऐसे रोकर ही फांसी पर चढ़ना था तो तूने क्रांति की राह चुनी ही क्यों? तब तो तुझे इस रास्ते पर कदम ही नहीं रखना चाहिए था।' इसके बाद 'बिस्मिल' ने अपनी आंखें पोंछ डालीं और कहा था कि यह आंसू मौत के डर से नहीं, तुमसे बिछड़ने के शोक में आए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें