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प्रकृति के अनमोल धरोहर को सहेजे हुए सोहगीबरवां, अब उठ रही है विकास की आवाज

Fri, 25 Sep 2020 10:19 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
महराजगंज जिले के सोहगीबरवां वन्य जीव अभ्यारण्य प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण है। इसको वर्ष 1987 में अभ्यारण्य घोषित किया गया। यहां सघन वन एवं वन्य जीव पाए जाते हैं। अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों इस वन्य जीव विहार में देखे जा सकते हैं।

 
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग भौगोलिक रूप से कुशीनगर जनपद से लगा है। जिसका क्षेत्रफल 42820.1हेक्टेयर/428.201 किलोमीटर है। प्राकृतिक रूप से उत्तर में नेपाल राष्ट्र का चितवन राष्ट्रीय उद्यान एवं पूर्व में बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है। बड़ी गंडक, छोटी गंडक, महाव, रिहाव, पड़वा, मलाव, पोटहा आदि नदियां सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग से होकर गुजरती हैं। नदियों के अतिरिक्त प्राकृतिक रूप से जंगल के अंदर कई ताल भी हैं। अभ्यारण्य के अंदर बड़े-बड़े घांस के मैदान क्षेत्रफल 3942.5 हेक्टेयर विद्यमान हैं।
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सांसद पंकज चौधरी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग मे जहां एक ओर खुली झाड़ियों के वन हैं, वहीं दूसरी ओर साल तथा मिश्रित प्रजातियों के घने वन हैं। इस प्रकार यह अभ्यारण्य शाकाहारी जानवरों के साथ-साथ बाघ, तेंदुआ जैसे कई अन्य मांसाहारी जानवरों का भी वास स्थल है।

सांसद पंकज चौधरी ने बताया कि सोहगीबरवां वन्य जीवप्रभाग को टाइगर रिजर्व घोषित करने की मांग संसद में उठाया गया है। जिससे इस क्षेत्र के विकास के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग को विकसित करने के लिए संसद में शून्य काल में मामला उठाया गया। निश्चित रूप से सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाव अनमोल प्रकृतिक धरोहर से भरा हुआ हैं।

 

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- फोटो : अमर उजाला।
इन जीव जंतुओं का है बसेरा
वन्य जीव अभ्यारण्य में बाघ एवं तेंदुओं का वास होने के अलावा इस जीव विहार में अनेक प्रकार के स्तनपायी जीव जैसे भेड़िया, लकड़बग्घा, गीदड़, जंगली सुअर, सांभर, चीतल, नीलगाय, पांडा, लंगूर, बंदर, बिज्जू, ऊदबिलाव आदि पाए जाते हैं। पक्षियों में काला तीतर, भूरा तीतर, बटेर, मोर, कबूतर, धनेश, नीलकंठ, कठफोड़वा ,भुजंगा, किलकिला, बुलबुल, मैना, चील, कोयल, उल्लू, गिद्ध, बाज, कीलक, ट्रीपाई, फाख्ते, तोते आदि पाए जाते हैं।

उक्त के अतिरिक्त दूर-दराज के क्षेत्रों से जैसे कांगड़ा, लद्दाख चीन एवं तिब्बत से आने वाले जल पक्षी जैसे -सिखपर, बरहेडेड गूज, लालसर, सुर्खाब, गैडवल, डार्टर, कूट, टील, मोरहेंस विभिन्न प्रकार के स्टार्क, कारमोरेंट नवंबर से मार्च तक कलरव करते देखे जा सकते हैं। शीतकाल में हजारों की संख्या में इन पक्षियों की उपस्थिति पूरे जलाशय को मनमोहक स्वरूप प्रदान करती है।

 
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
मूसली, पीपर, अश्वगंधा भी मिलता है
वन्य जीव अभयारण्य में प्रमुख रूप से साल, असना, सागौन आदि मुख्य प्रजातियों के साथ-साथ जामुन, अर्जुन, हर्रे, बहेड़ा, रोहिनी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इस वन क्षेत्र औषधीय प्रजातियां जैसे मूसली, पीपर, अश्वगंधा, सर्पगंधा, मीठीनीम, मैदा, जराकुश, सतावार, शिकाकाई, लटजीरा आदि प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। यहां विभिन्न प्रकार की तितलियां व मैथ भी पाए जाते हैं।

विचरण करते हैं बाघ गैंडे
वन्यजीव अभ्यारण्य में बाघ ,गैंडा, बारासिंघा, तेंदुए इत्यादि वन्य जीव पाए जाते रहे हैं। इसकी सीमा वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से जूडी होने के कारण जहां से स्वछंद रूप से बाघ, गैंडे तथा अन्य वन्य जीव यहां विचरण करते हैं।
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