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यूपी: पति को बचाने में बिक गए गहने फिर भी नहीं बची जान, पत्नी बोली- अब तो सिर्फ बच्चों के लिए जिंदा हूं

Wed, 09 Jun 2021 06:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
कोरोना ने बहुत से लोगों की जिंदगी निगल ली। तमाम परिवार उजड़ गए और कई बच्चे अनाथ हो गए। यह दास्तां भी गोरखपुर के पीपीगंज कस्बे के रहने वाले ऐसे ही एक पीड़ित परिवार की है। कोरोना की चपेट में आए पति को बचाने के लिए उसकी पत्नी, गोद में 25 दिन का बच्चा और साथ में तीन साल की बेटी के साथ घर से अस्पताल तक दौड़ती रही। पेट काटकर किसी अनहोनी और बच्चों के भविष्य के लिए जो भी जमा पूंजी इकट्ठा की थी वह इलाज में चली गई। जो दो-चार गहने थे उन्हें भी बेचना पड़ा। मगर ये सारे जतन भी बेकार साबित हुए। पति जिंदगी की जंग हार गया। सब कुछ गंवाने के बाद पत्नी के पास बाकी बचा घनघोर अंधेरा, हताशा और आंसू।

महज 28 साल की उम्र में ही पति के गुजर जाने से पत्नी का रो-रोकर हाल बेहाल है। परिवार चलाने की चुनौती और दो मासूम बच्चों की परवरिश, पढ़ाई की चिंता उसे भीतर ही भीतर साल रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...

 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
वह कहती है कि जिंदगी तब भी आसान नहीं थी। पति सब्जी का ठेला लगाकर थोड़ा बहुत ही कमा पाते थे। मगर इस बात की तसल्ली थी कि उनका साया था। उम्मीद थी कि आज नहीं तो कल सब ठीक हो जाएगा। 25 दिन पहले जब छोटा बेटा पैदा हुआ तो उसने संकल्प लिया था कि उसके साथ ही साथ तीन साल की बेटी को भी अच्छी शिक्षा दिलाएंगे। भले इसके लिए कितनी ही मेहनत क्यों नहीं करनी पड़े। इतना कहते हुए फफक कर रो पड़ी। थोड़ी देर में किसी तरह अपने आप को संभाला और बोली कि किसे पता था कि पढ़ाई तो दूर उनका गुजर बसर करना भी इतना कठिन हो जाएगा। पति ने साथ छोड़ा तो रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया।

 
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कोरोना वायरस। - फोटो : amar ujala
अभी कोई झांकने तक नहीं आया
16 जून को ही ब्रह्मभोज है मगर जरूरी रस्म तक पूरा करने के रुपये नहीं रह गए। अगल-बगल के लोग भरोसा दिला रहे कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की परवरिश के लिए सरकार मदद करेगी मगर अभी तक कोई झांकने तक नहीं आया। पति के बिछड़ने के सदमे ने उसे भीतर से इतना तोड़ दिया है वर्ना शायद वह यह नहीं कहती कि यदि बच्चों की फिक्र न होती तो वह भी अब तक दुनिया छोड़ चुकी होती।  

 

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कोरोना का कहर। - फोटो : पीटीआई
आप चाहें तो कर सकते हैं इस पीड़ित परिवार की मदद
खबर में पीड़ित परिवार की पहचान नहीं उजागर की गई है। मगर कोई इस परिवार की मदद करना चाहता है तो वह 9794822057 पर संपर्क कर पूरी तस्दीक करने के बाद मदद कर सकता है। यह पीड़ित परिवार का नंबर है।

 
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गोरखपुर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
अनाथ बच्चों की मदद के लिए शुरू हुई है बाल सेवा योजना
सरकार ने कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों और उनकी देखरेख करने वालों की मदद के लिए बाल सेवा योजना शुरू की है। इसके तहत ऐसे सभी बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। बच्चों की देखभाल करने के लिए चार हजार रुपये की हर माह वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसी तरह जिनकी कोई भी देखभाल करने वाला नहीं है, सरकार उनके रहने-खाने और पढ़ाई आदि सभी की व्यवस्था करेगी। डीएम ऐसे बच्चों के अभिभावक होंगे। जिले में फिलहाल अभी सर्वे कर ऐसे बच्चों को चिह्नित करने का काम चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इन बच्चों को मदद मिलनी शुरू हो जाएगी।
 
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