कोरोना ने बहुत से लोगों की जिंदगी निगल ली। तमाम परिवार उजड़ गए और कई बच्चे अनाथ हो गए। यह दास्तां भी गोरखपुर के पीपीगंज कस्बे के रहने वाले ऐसे ही एक पीड़ित परिवार की है। कोरोना की चपेट में आए पति को बचाने के लिए उसकी पत्नी, गोद में 25 दिन का बच्चा और साथ में तीन साल की बेटी के साथ घर से अस्पताल तक दौड़ती रही। पेट काटकर किसी अनहोनी और बच्चों के भविष्य के लिए जो भी जमा पूंजी इकट्ठा की थी वह इलाज में चली गई। जो दो-चार गहने थे उन्हें भी बेचना पड़ा। मगर ये सारे जतन भी बेकार साबित हुए। पति जिंदगी की जंग हार गया। सब कुछ गंवाने के बाद पत्नी के पास बाकी बचा घनघोर अंधेरा, हताशा और आंसू।
महज 28 साल की उम्र में ही पति के गुजर जाने से पत्नी का रो-रोकर हाल बेहाल है। परिवार चलाने की चुनौती और दो मासूम बच्चों की परवरिश, पढ़ाई की चिंता उसे भीतर ही भीतर साल रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...