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Exclusive: मोबाइल, लैपटॉप की लत से बच्चों की पुतलियों का घट-बढ़ रहा आकार, जानिए डॉक्टर क्या दे रहें सलाह

Sat, 07 Jan 2023 02:38 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र,गोरखपुर।
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मोबाइल में गेम खेलता बच्चा - फोटो : अमर उजाला
मोबाइल फोन और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल आंखों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इससे आंखों की कोशिकाएं सूख रही हैं और बच्चों की आंखों और पुतिलयों का आकार घट-बढ़ रहा है। इसकी वजह से छह माह के अंदर ऐसे मरीजों के चश्मों के नंबर में बदलाव करना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के बाद यह परेशानी ज्यादा बढ़ी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में हर दिन 25 से 30 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 80 फीसदी बच्चे शामिल हैं।

 
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बच्चों में मोबाइल की लत। - फोटो : social media
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि मायोपिया और हाइपर मेट्रोपिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना महामारी के बाद यह शिकायतें बच्चों में देखने को मिल रही है। इस बीमारी में बच्चों की आंखों से लेकर पुतलियों के आकार सामान्य आंखों और पुतिलयों की तुलना में घट-बढ़ रहा है। समय रहते अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती जाएगी और एक समय ऐसा आएगा कि दिखना एकदम कम हो जाएगा।

 
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मोबाइल की लत। - फोटो : social media
 बताया कि इसकी वजह यह है कि मोबाइल और लैपटॉप पर बच्चों का समय ज्यादा बीत रहा है। रेटिना में मोबाइल और लैपटॉप की रोशनी ऐसा असर डाल रही है कि आंखों के अंदर की कोशिकाएं सूखने लग रही हैं, जिसकी वजह से यह समस्या बच्चों में हो रही है।

बार-बार बदलना पड़ रहा नंबर
आईएमए के उपाध्यक्ष और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों के चश्मे के नंबर बार-बार बदलने पड़ रहे हैं। जबकि, पहले ऐसी दिक्कतें नहीं होती थीं। एक बार अगर किसी को चश्मा लग गया तो कम से तीन साल तक उसे चश्मे का नंबर नहीं बदलना पड़ता था, लेकिन अब छह माह के अंदर ही चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है। बताया कि हाइपर मेट्रापिया में प्लस और मायोपिया में माइनस नंबर के चश्मे मरीजों को लगाने पड़ रहे हैं।
 

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मोबाइल की लत - फोटो : सोशल मीडिया।
सामान्य आंखों की साइज
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कोविड के बाद यह बीमारी तेजी से बच्चों में देखने को मिली है। जबकि, पहले यह मायोपिया और हाइपर मेट्रोपिया 35 वर्ष से ऊपर के लोगों में देखने को मिलती थी। बताया कि सामान्य आंखों की साइज 20 से 23 मिलीमीटर होती है। जबकि, पुतली की साइज 10 से 12 मिलीमीटर होती हैं। यह साइज तीन वर्ष से लेकर जवान होने तक की है। वहीं, बीमारी की बात करें तो 18 से 19 मिलीमीटर आंखों की साइज और आठ से नौ मिलीमीटर पुतलियों की साइज देखने को मिल रही है।
 
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मोबाइल डेमो - फोटो : अमर उजाला
फैक्ट फाइल
आंखों की साइज   20 से 23 मिलीमीटर।
पुतली की साइज   20 से 12 मिलीमीटर।
आंखों पर दबाव बढ़ने पर मांसपेशियों फैलने और घटने लगती है।
एक मिमी आंख बड़ी होने पर चश्मे का दो नंबर आमतौर पर बढ़ता है।
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