मोबाइल की लत।
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बताया कि इसकी वजह यह है कि मोबाइल और लैपटॉप पर बच्चों का समय ज्यादा बीत रहा है। रेटिना में मोबाइल और लैपटॉप की रोशनी ऐसा असर डाल रही है कि आंखों के अंदर की कोशिकाएं सूखने लग रही हैं, जिसकी वजह से यह समस्या बच्चों में हो रही है।
बार-बार बदलना पड़ रहा नंबर
आईएमए के उपाध्यक्ष और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों के चश्मे के नंबर बार-बार बदलने पड़ रहे हैं। जबकि, पहले ऐसी दिक्कतें नहीं होती थीं। एक बार अगर किसी को चश्मा लग गया तो कम से तीन साल तक उसे चश्मे का नंबर नहीं बदलना पड़ता था, लेकिन अब छह माह के अंदर ही चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है। बताया कि हाइपर मेट्रापिया में प्लस और मायोपिया में माइनस नंबर के चश्मे मरीजों को लगाने पड़ रहे हैं।