गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी मेले की तैयारी।
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आज जहां गोरखनाथ मंदिर है, वहीं पर उन्होंने अपनी धुनी रमा दी और खप्पर रख दिया। उस दिन मकर संक्रांति थी। किसी संत के आने की सूचना से क्षेत्र के श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे। लोग उनके खप्पर में खिचड़ी डालने लगे पर वह भरा नहीं। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ ने वहीं खिचड़ी बनवाई और जितने भक्त आए सभी को खिलाया, पर खिचड़ी कम नहीं हुई। तब से खिचड़ी चढ़ाने की शुरू हुई परंपरा आज भी कायम है। हर साल मकर संक्रांति पर खिचड़ी मेला लगता है।