डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
उनके बेहद करीबी और लिटरेरी फेस्ट के आयोजक मंडल के सदस्य, गोरखपुर विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. हर्ष सिन्हा कहते हैं कि 'दर्शक हैं, श्रोता हैं पर आयोजक नहीं। अब सब कुछ खत्म। गोरखपुर में कोई अहमद हुसैन- मुहम्मद हुसैन, कोई वसीम बरेलवी, कोई कुमार विश्वास, कोई मनोज मुन्तशिर, कोई अखिलेश मिश्र, कोई कुंवर बेचैन नहीं आएगा। गोरखपुर लिटरेरी फेस्टिवल का पर्दा गिर चुका है, क्योंकि हमारा अपना आरके स्टूडियो बंद हो गया है।' प्रो हर्ष कहते है, हर दिल अजीज, साहित्य संस्कृति और कला के लिए निस्वार्थ भाव से मंच सजाते, बनाते हुए सबको जोड़कर काफिले खड़े करने वाला शख्स नहीं रहा।