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नहीं रहे गोरखपुर के 'नवाब' डॉक्टर रजनीकांत, करीबियों ने कहा- 'गिर गया अब आरके स्टूडियो का पर्दा'

Mon, 19 Oct 2020 03:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट के दौरान की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक और साहित्य व कवि सम्मेलनों के आयोजक डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव का सोमवार की सुबह अपोलो अस्पताल नई दिल्ली में निधन हो गया। वे कोरोना संक्रमित थे और 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। अपने पीछे वे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। डॉ. रजनीकांत के निधन से शहर के साहित्यकार, संगीत प्रेमी और कवि सम्मेलन के श्रोता स्तब्ध हैं।
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डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
उनके बेहद करीबी और लिटरेरी फेस्ट के आयोजक मंडल के सदस्य, गोरखपुर विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. हर्ष सिन्हा कहते हैं कि 'दर्शक हैं, श्रोता हैं पर आयोजक नहीं। अब सब कुछ खत्म। गोरखपुर में कोई अहमद हुसैन- मुहम्मद हुसैन, कोई वसीम बरेलवी, कोई कुमार विश्वास, कोई मनोज मुन्तशिर, कोई अखिलेश मिश्र, कोई कुंवर बेचैन नहीं आएगा। गोरखपुर लिटरेरी फेस्टिवल का पर्दा गिर चुका है, क्योंकि हमारा अपना आरके स्टूडियो बंद हो गया है।' प्रो हर्ष कहते है, हर दिल अजीज, साहित्य संस्कृति और कला के लिए निस्वार्थ भाव से मंच सजाते, बनाते हुए सबको जोड़कर काफिले खड़े करने वाला शख्स नहीं रहा।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
महफिल सजाकर अपने जन्मदिन को यादगार बनाते थे
डॉ. रजनीकांत भले ही पेशे से डॉक्टर थे लेकिन साहित्य और संगीत में उनकी आत्मा रचती बसती थी। तभी तो अपने जन्मदिन को यादगार बना देते थे। बक्शीपुर स्थित उनके आवास पर ही महफिल सजती थी और हर बार देश का एक नामी शख्स मौजूद होता था।

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
डॉ रजनीकांत बहुत जल्दी ही आत्मीय रिश्ता बना लेते थे तभी तो अहमद हुसैन- मुहम्मद हुसैन, वसीम बरेलवी, डॉ राहत इंदौरी, कुमार विश्वास, मनोज मुन्तशिर, अखिलेश मिश्र, कुंवर बेचैन जैसे न जाने कितने शख्स उनके बुलावे पर इनकार नहीं कर सके।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
जब वसीम बरेलवी ने उनके घर पर ही कहा था- 'नवाब यानी डॉ रजनीकांत इस शहर से जोड़ने की मुख्य कड़ी हैं'
बात सात अक्तूबर 2018 की है। जब पद्मश्री मशहूर शायर वसीम बरेलवी गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट में आये थे और डॉ. रजनीकांत के घर पर रुके थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा था कि जब गोरखपुर आता हूं तो नवाब के ही घर रुकता हूं। ये ही गोरखपुर से जोड़ने की अहम कड़ी हैं। इन्हें कौन भला मना कर सकता है। दरअसल, रजनीकांत को लोग नवाब नाम से भी पुकारते थे।
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