किसी सनद की जरूरत नहीं पड़ी है 'जफर' हमारा ऐब ही आखिर हुनर हमारा हुआ। जफर इकबाल की लिखी हुई यह पंक्ति उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र के भुड़वार गांव निवासी मणिकांत पांडेय पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। बचपन में सादे कागज और दीवारों पर आड़ी तिरछी जिन लकीरों को खींचने के लिए उन्हें फटकार मिलती थी, अब वही लकीरें मणिकांत के हुनर की पहचान बन चुकी हैं। पेंटिंग की बिना कोई औपचारिक शिक्षा लिए मणिकांत तस्वीरों को बनाने में इतने अभ्यस्त हैं कि किसी भी व्यक्ति अथवा दृश्य का हूबहू तस्वीर चंद मिनट में ही तैयार कर देते हैं।
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मणिकांत पांडेय को तस्वीरों से मिली खास पहचान
- फोटो : अमर उजाला।
26 वर्षीय मणिकांत गुजरात की एक प्राइवेट कंपनी में बतौर कंम्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं। लेकिन, उनका असली हुनर चित्रकारी और पेंटिंग में दिखता है। कंपनी में काम करने के बाद मणिकांत अपने खाली समय का सदुपयोग चित्रकारी में करते हैं। इनकी बनाई तस्वीरों के लिए इनकी कंपनी से इन्हें प्रशस्ति पत्र के अलावा भी कई कार्यक्रमों में सम्मान भी मिल चुका है।
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मणिकांत द्वारा बनाई गई तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
मणिकांत छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, उद्योगपति बालकृष्ण गोयनका आदि कई महान शख्सियतों की तस्वीर बना कर उन्हें खुद भेंट कर चुके हैं। एसोचैम की सालाना बैठक में इनकी बनाई प्रधानमंत्री की तस्वीर को जब एसोचैम के अध्यक्ष बालकृष्ण गोयनका ने पीएम मोदी को भेंट की, तब पीएम भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, महिला उद्योगपति दीपाली गोयनका, कैलाश विजयवर्गीय समेत कई क्षेत्रों की महान शख्सियतों की तस्वीरें बना चुके हैं।
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पेंटिंग की शिक्षा हासिल किए बगैर ही चित्रकारी में माहिर हैं मणिकांत।
- फोटो : अमर उजाला।
हाल ही में गलवान घाटी में शहीद संतोष कुमार की इनकी बनाई गई तस्वीर को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया। गांव आने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के लोग इनसे अपनी तस्वीर बनवाने के लिए इनके घर पहुंच जाते हैं। इसके लिए वे कोई पारिश्रमिक भी नहीं लेते। मणिकांत के पिता दिग्विजय नाथ पांडेय प्राइवेट टीचर हैं। जबकि माता रागिनी देवी गृहणी हैं। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के मणिकांत को बचपन से ही तस्वीर बनाने में रुचि है। वह खाली समय में अपनी कॉपी और दीवारों पर भी तस्वीर बनाने की कोशिश करते रहते थे। इसके लिए कई बार उन्हें फटकार भी मिली। लेकिन इससे तस्वीर बनाने में उनकी रुचि कम होने की बजाय बढ़ती ही चली गई। क्षेत्र के संग्राम सिंह इंटर कॉलेज से 12वीं उत्तीर्ण कर देवरिया से आईटीआई की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद इनकी नौकरी गुजरात की एक कंपनी में लग गई। नौकरी के अलावा और खाली समय में तस्वीरें बनाने का काम भी उन्होंने जारी रखा।
मणिकांत द्वारा बनाई गई तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
साथी को देख जगी प्रेरणा, नहीं लिया कोई प्रशिक्षण
मणिकांत कहते हैं कि उन्होंने चित्रकार बनने के लिए कोई कोर्स नहीं किया है। बचपन में अपने एक साथी को विज्ञान विषय के लिए कुछ तस्वीरें बनाते देख उनकी रुचि पेंटिंग में हुई और तब से वे तस्वीरें बनाने लगे। तस्वीरों को बनाने में रुचि और रोजाना अभ्यास से ही उनकी बनाई तस्वीरें अब लोगों को पसंद आती हैं और लोग तारीफ करते हैं। लोगों की तारीफ को ही मणिकांत अपनी सबसे बड़ी कमाई बताते हैं। ग्लास पेंटिंग, वाल डिजाइनिंग, वाटर कलर पेंटिंग, ब्लैक एंड व्हाइट कलर स्केचिंग आदि बखूबी कर लेते हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने कहीं से कोई ट्रेनिंग नहीं ली है।