उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के फुलवरिया गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। हादसे के चौथे दिन भी गांव में सन्नाटा पसरा है। घटना के बारे में सोचकर हर किसी की रूह कांप जा रही है।
ये हुई थी घटना
शनिवार की रात मऊ जिले में चालक के झपकी आने के चलते कार सड़क किनारे बनी पुलिया से टकराकर गहरे नाले में जा गिरी। तेज गति होने के कारण कार पांच फीट से ज्यादा गहरे नाले में गिरने के बाद पलट गई, जिससे पिछली सीट पर सवार चारों बच्चों और महिला को निकलने का मौका नहीं मिला और उनकी दम घुटने से मौत हो गई। वहीं, कार के पुलिया से टकराने के बाद दरवाजा खुल जाने से कार चला रहे महेश और दीपिका सड़क पर ही गिर गए। घायल महेश तथा उनकी भयोहू दीपिका को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं रविवार को पोस्टमार्टम के बाद जब पांचों शव गांव पहुंचे तो पूरे इलाके में मातम छा गया। चार मासूमों समेत पांच लोगों का शव देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
पलक झपकते ही सूना हो गया पतरू का आंगन... गांव में छाया मातम
पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां खत्म हो गईं। घर की बहू और चार मासूमों की मौत की खबर गांव में जिसने भी सुनी, आंखें डबडबा गईं। छत्तीसगढ़ में रह रहे मासूम बच्चों के बाबा पतरू को जब मौत की खबर मिली तो दहाड़े मारकर रोने लगे। बिलखते हुए बोले कि मेरा तो पूरा संसार उजड़ गया।
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हादसे के बाद कार से शव निकालने पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला।
घायल पिता को भी पत्नी और बच्चों की मौत की खबर से रविवार शाम तक अंजान रखा गया था। क्योंकि उनकी भी हालत नाजुक बनी हुई थी। वहीं सोमवार को जब हादसे के बारे में उन्हें पता चला तो रो-रो कर उनका बुरा हाल हो गया। गांव के मुकेश विश्वकर्मा, शेषमणि जायसवाल, गौतम कन्नौजिया, मोहन कुमार का कहना है कि बच्चों से आस पड़ोस के लोगों का खास लगाव था। जब भी आते थे, खेलते-कूदते थे। अब ऐसा नहीं होगा। घर-आंगन सूना हो गया है।
पिछले 20 वर्षों से रखते हैं ताजिया
ग्रामीणों के मुताबिक घायल महेश मोदनवाल के पिता पतरू पिछले 20 वर्षों से मोहर्रम का ताजिया रखते हैं। वह परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग हो गए तो परिजनों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
फुलवरिया गांव के शेषमणि जायसवाल, मोहन कुमार, कृष्णा मोदनवाल व गौतम कुमार ने बताया कि 20 वर्ष पहले पतरू सड़क हादसे में घायल हो गए। परिजनों से मन्नत मांगी और कहा कि पतरू के ठीक होने पर ताजिया रखेंगे। ठीक हुए तो ताजिया रखने का सिलसिला चल पड़ा। इस बार भी ताजिया रखने आ रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।