त्योहारों पर घर लौटना मुसीबत भरा हो गया है। ट्रेनों में इस कदर भीड़ है कि स्लीपर कोच की हालत जनरल जैसी हो गई है। चारों तरफ सिर ही सिर नजर आ रहे हैं। ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं है। भीड़ की वजह से स्लीपर कोच में अपनी सीट तक पहुंचने में पसीने छूट जा रहे हैं। जो जैसे-तैसे पहुंच जा रहे हैं, उन्हें गंगा नहा लेने जैसा सुखद एहसास हो रहा है।
जितनी दुर्दशा दिल्ली-मुंबई से गोरखपुर आने में हो रही है, उससे अधिक तो गोरखपुर से छपरा जाना तकलीफदेह हो गया है। गोरखपुर जंक्शन पर ट्रेन आते ही यात्री गिरते-पड़ते कोच में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, ट्रेन दिल्ली से फुल आ रही है। जिन यात्रियाें ने गोरखपुर से छपरा, सिवान का टिकट लिया है, उन्हें और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।