गोरखपुर शहर के बड़े सराफा कारोबारी अजय वर्मा की मौत के मामले में कुछ तो ऐसा है ही जिस पर पर्देदारी हो रही है। मौत छत से गिरने से हुई, यह साफ हो चुका है, मगर गिरे कैसे, यही लाख टके का सवाल है। इस सवाल का जवाब परिजनों ने नहीं दिया। जिस कानूनी प्रक्रिया से इस सवाल का जवाब मिल सकता था, उसे होने नहीं दिया। पुलिस ने 'जो हुक्म मेरे आका' के तर्ज पर वही किया, जो परिजन चाहते थे। कानूनी प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी कर दी, यानी, परिजनों की पर्देदारी में पुलिस की 'साझेदारी' हो गई। इस साझेदारी में पुलिस ने संदिग्ध हालात में मौत के मामले में जरूरी कानूनी प्रक्रिया की न केवल अनदेखी की, बल्कि अपने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक से झूठ बोल दिया। डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी गोरखपुर से इस संबंध में सवाल करने पर वे कहते हैं कि मुझे भी थाने की पुलिस ने यही बताया था कि मंगलवार रात छत से गिरकर मौत हो गई थी, बुधवार सुबह जानकारी मिलने पर पहुंचे तो घरवाले अंत्येष्टि कर चुके थे। सफेद झूठ। गोरखनाथ पुलिस ने अपने ही आला अफसर से आखिर यह झूठ क्यों बोला ? परिजनों के इशारे पर क्यों पोस्टमार्टम की प्रक्रिया नजरंदाज की ? संदिग्ध मौत के मामले में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कानूनी प्रक्रिया को क्यों अंजाम नहीं दिया ? यही वे सवाल हैं, जो साफ इशारा करते हैं कि दाल में कुछ तो काला है।
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सराफा कारोबारी अजय वर्मा की मौत का मामला।
- फोटो : अमर उजाला।
अमर उजाला को मंगलवार रात ही इसके संकेत मिल गए थे कि कुछ तो गड़बड़ है। बुधवार को पूरे मामले की पड़ताल की गई तो सबसे पहले पुलिस का झूठ पकड़ा गया। पुलिस को मामले की जानकारी बुधवार नहीं, मंगलवार रात को ही हो गई थी। घटना मंगलवार रात 11 बजकर 11 मिनट पर हुई। 11:24 मिनट पर मोटरसाइकिल सवार अपाचे पुलिस मौके पर पहुंच गई। यह सब घटनास्थल के ठीक सामने स्थित गोकुल अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी के कैमरे में कैद है। जिसकी फुटेज अमर उजाला के पास सुरक्षित है। रात 12:18 बजे थाने की जीप भी पहुंच गई। बुधवार सुबह करीब आठ बजे हल्का इंचार्ज घटनास्थल पर पहुंचे, उस वक्त घर के लोग अंत्येष्टि के लिए जा चुके थे। सीसीटीवी फुटेज में उस रात वाहनों और लोगों के आवाजाही का पूरा घटनाक्रम कैद है।
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सराफा कारोबारी अजय वर्मा की मौत का मामला।
- फोटो : अमर उजाला।
सुबह 07:49 बजे ही अंत्येष्टि के लिए निकल गए
भारतीय समाज का जिस तरह का ताना बाना है, उसमें खुशी के हर मौके नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, मगर गमी के मौके पर रिश्तेदार-नातेदार, दोस्त-यार सब पहुंचते हैं। यही नहीं उनके इंतजार में अंत्येष्टि कई-कई घटों तक रोकी जाती है। कोविड काल को छोड़ दें तो इससे हर कोई सहमत होगा। इसके ठीक उलट सुबह-सुबह करीब 07:49 बजे ही अर्थी सजाकर, घरवाले महज 10-15 लोगों के साथ निकल गए। आनन-फानन शव को आग के हवाले कर दिया गया, आखिर इतनी जल्दी क्या थी ? ये अमर उजाला का सवाल नहीं, अजय वर्मा के मोहल्ले के लोग, उनके कारोबारी साथी और अन्य परिचित पूछ रहे हैं।
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सराफा कारोबारी अजय वर्मा की मौत का मामला।
- फोटो : अमर उजाला।
सीसीटीवी फुटेज की जांच से मिल सकता है सुराग
खुद अजय वर्मा के घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बेटे आकाश वर्मा का कहना है कि घर के बाहर दाहिने तरफ लगा एक सीसीटीवी कैमरा खराब है। बाएं तरफ का कैमरा काम कर रहा है, लेकिन कभी-कभी दिक्कत करता है। सराफा कारोबारी के घर के सामने ही गोकुल अपार्टमेंट है। गोकुल अपार्टमेंट के मुख्य द्वार पर भी सीसीटीवी कैमरा लगा है। इसकी जांच भी की जा सकती है।
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सराफा कारोबारी अजय वर्मा की मौत का मामला।
- फोटो : अमर उजाला।
...सीसीटीवी कैमरे में कैद है सराफा कारोबारी की मौत से जुड़े घटनाक्रम
मंगलवार की रात 11:11 बजे- घर की छत से अजय वर्मा गिरे थे।
रात 11:11: 22 बजे-सामने स्थित गोकुल अपार्टमेंट के गार्ड दौड़ पड़े।
रात 11:16 बजे-एक सफेद रंग की गाड़ी आई। शायद इसी से अजय को अस्पताल लेकर गए थे।
रात 11:24 बजे-पुलिस मौके पर पहुंच गई थी।
रात 02:00 बजे-घर के बाहर काफी लोग एकत्र दिखाई दे रहे थे।
बुधवार सुबह 07:49 बजे-शव को अंत्येष्टि के लिए घरवाले लेकर चले गए।
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सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शिवपूजन यादव की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
174 सीआरपीसी में मुकदमा दर्ज कर पोस्टमार्टम कराना चाहिए था
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शिवपूजन यादव ने बताया कि छत से गिरने की घटना की जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची तो उसे घायल को अस्पताल लेकर खुद जाना चाहिए था। संदिग्ध हालात में मौत होने पर सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कराकर पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। असलियत सामने आ जाती। अगर पुलिस बाद में भी गई और संदिग्ध मौत की जानकारी हो गई तो उसे पोस्टमार्टम कराना ही चाहिए था। संदिग्ध हालात में मौत के मामले में परिवार के लिखकर देने से कि वह पोस्टमार्टम नहीं चाहते हैं, इस कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रत्यक्षदर्शी ने ऐसा कहा, पुलिस जांचे तो सच सामने आए
पड़ताल के दौरान घटनास्थल पर बुधवार को मिले एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक मंगलवार रात सराफ के घर विवाद हुआ था। चीखने-चिल्लाने की तेज आवाज बाहर तक आ रही थी। देर रात सराफा कारोबारी का एक परिजन बाइक से घर पहुंचा था। उसके घर के ऊपर जाने के बाद आवाज और तेज हो गई थी। छत पर हलचल दिख रही थी। थोड़ी देर बाद ही अजय वर्मा को सड़क पर गिरा देखा गया था। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक घटना के कुछ देर बाद ही ड्यूटी कर रहे पुलिस वाले पहुंच गए। आनन-फानन अजय को अस्पताल ले जाने की बात कही गई, लेकिन पुलिस साथ नहीं गई। घरवाले अस्पताल लेकर गए। उस वक्त तक सराफ की मौत हो गई थी। थोड़ी ही देर बाद कार से शव लेकर घरवाले लौट आए। बुधवार सुबह 7:49 बजे अजय वर्मा की अर्थी उठी और अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। (अमर उजाला प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान की पुष्टि नहीं करता)
आकाश वर्मा (मृत सराफ अजय वर्मा के पुत्र) ने बताया कि पुलिस के सामने सारी बात रखी थी। परिवार की तरफ से पुलिस को लिखकर दिया गया कि पोस्टमार्टम नहीं कराना है। जिस वक्त घटना हुई, उस वक्त पिता अजय वर्मा के अलावा दूसरा कोई व्यक्ति छत पर नहीं था। घर पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। एक सीसीटीवी कैमरा पांच या छह महीने से खराब है। दूसरा ठीक है, लेकिन कभी-कभी दिक्कत करता है।