गोरखपुर जनपदवासियों को कोविड टीकाकरण अभियान के तहत नए साल पर नई वैक्सीन का तोहफा मिलेगा। एक लाख लोगों को लगाने के लिए सरकार ने जायडस कैडिला की जायकोव-डी वैक्सीन की तीन लाख डोज आवंटित की है। इस वैक्सीन की तीन खुराक लोगों को लेनी होगी। तीनों खुराकों को 28 दिन के अंतराल पर लेना है।
शासन की ओर से जिले में फिलहाल दो कंपनियों की वैक्सीन लगाई जा रही है। इनमें कोविशील्ड और कोवैक्सीन शामिल है। कोविशील्ड और कोवैक्सीन के दो-दो डोज लगाए जा रहे हैं। कोविशील्ड का दूसरा डोज 84 दिन और कोवैक्सीन का दूसरा डोज 28 दिन बाद लगाया जा रहा है। इन सबके बीच शासन ने जायकोव-डी वैक्सीन का आवंटन किया है। एक-दो दिनों में यह वैक्सीन विभाग को मिल जाएगी।
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कोरोना वैक्सीन।
- फोटो : istock
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एनके पांडेय ने बताया कि यह वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन की तरह प्रभावी और सुरक्षित है। 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लगाई जाएगी। अब तक नौ लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें वैक्सीन की कोई डोज नहीं लग सकी है। अपील की है कि लोग टीकाकरण के लिए आगे आएं।
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डिस्पोजेबल जेट एप्लीकेटर या फार्मा जेट इंजेक्टर से लगाया जाएगा टीका
डॉ एनके पांडेय ने बताया कि जायकोव-डी वैक्सीन की खास बात यह है कि इसे सुई से नहीं लगाई जाएगी। इसे एक डिस्पोजेबल जेट एप्लीकेटर या फार्मा जेट इंजेक्टर की मदद से लगाया जाएगा। इसे लगाते वक्त दर्द महसूस नहीं होगा। बुधवार से स्वास्थ्यकर्मियों को इस वैक्सीन को लगाने के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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कोरोना वैक्सीन।
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क्या है डिस्पोजेबल जेट एप्लीकेटर या फार्मा जेट इंजेक्टर
डॉ एनके पांडेय ने बताया कि इंजेक्टर में स्प्रिंग होते हैं। इनके जरिए वैक्सीन की निश्चित मात्रा को शरीर में प्रवेश कराया जाता है। यह धारा एक सेकंड के 10वें हिस्से में स्किन को भेदकर उतकों तक प्रवेश कर जाती है। इसमें किसी और चीज की जरूरत नहीं होती है। यह डिवाइस एक स्टेपलर के आकार की होती है। इससे वैक्सीन की 0.1 मिलीलीटर खुराक दी जाती है।
इस डिवाइस के तीन हिस्से होते हैं। इंजेक्टर, सिरिंज और फिलिंग एडैप्टर। फार्मा जेट नीडल-फ्री इंजेक्टर तेज और सुरक्षित है। इसमें किसी तरह की सुई का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इससे सुई से लगने वाली किसी भी तरह की चोट या समस्या की संभावना खत्म हो जाती है। साथ ही सिरिंज के दोबारा इस्तेमाल या संक्रमण की भी संभावना नहीं रहती।