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जरूरी नहीं हर खांसी वायरल और कोविड हो, तत्काल लें डॉक्टर की सलाह और कराएं ये जांच

Sat, 20 Feb 2021 05:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
खांसी एक ऐसा लक्षण है जो वायरल फीवर, कोविड और टीबी तीनों में पाया जाता है। खांसी आने पर लोग अक्सर दवा की दुकानों से सीरप या दवाएं ले लेते हैं, जो सही नहीं है। हर खांसी वायरल या कोविड नहीं होती है। अगर दो सप्ताह तक खांसी आए और शाम को पसीने के साथ बुखार हो तो टीबी जांच अवश्य कराएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि समय से टीबी की जांच न होने पर और खांसी को सिर्फ बुखार का हिस्सा समझ कर दवा कराने पर बड़े खतरे को दावत दे रहे हैं। इस स्थिति में अक्सर मरीज मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीज हो जाता है। इसकी वजह से उसे द्वितीय पंक्ति की दवाएं देनी पड़ती है।
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टीबी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
कहा कि तुलनात्मक रूप से प्रथम श्रेणी के दवाओं की अपेक्षा ये दवाएं कमजोर होती हैं एवं शरीर पर दुष्प्रभाव भी ज्यादा हाता है। अगर दो सप्ताह तक लगातार खांसी आ रही हो और तेजी से वजन घट रहा हो। भूख न लगती हो। सीने में दर्द हो। शाम को हल्के बुखार के साथ पसीना आए तो टीबी की जांच अवश्य करवानी चाहिए।


 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
48 केंद्रों पर होती है निशुल्क जांच
उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विराट स्वरूप श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में सीएचसी, पीएचसी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) मिला कर कुल 48 केंद्रों पर टीबी के माइक्रोस्कोपिक जांच की सुविधा उपलब्ध है। माइक्रोस्पोकोपिक और एक्स-रे जांच के बाद जिन लोगों में टीबी की पुष्टि हो जाती है उनकी सीबीनेट और ट्रूनेट जांच कराई जाती है।
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कोरोना जांच - फोटो : राजन राय
सीबीनॉट जांच की निशुल्क सुविधा बीआरडी मेडिकल कॉलेज, सीएचसी बड़हलगंज और जिला क्षय रोग केंद्र पर उपलब्ध है। ट्रूनेट जांच की सुविधा पिपरौली, खोराबार, पिपराईच, भटहट, कैंपियरगंज, बेलघाट और जिला क्षय रोग केंद्र पर मौजूद है।
 
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