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Gorakhpur News: बूस्टर डोज से भी आगे है कोरोना वायरस, वैक्सीन नहीं दे पा रही सुरक्षा

Sat, 15 Apr 2023 05:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

कोरोना वायरस की दस्तक एक बार फिर से जिले में हो गई है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि, इस बार मिले मरीजों में वायरस का कौन सा स्वरूप संक्रमण फैला रहा है, इसकी जानकारी अब तक नहीं हो पाई है। लेकिन पिछले दिनों मिले मरीजों में छह वैरिएंट की पुष्टि हो चुकी है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कोरोना वायरस की जांच करते डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना वायरस का स्वरूप कब बदल जाए इसका पता भी नहीं चल पा रहा है। अब तक छह से अधिक बार काेरोना वायरस की संरचना में बदलाव हुआ है। यह बदला स्वरूप वैक्सीन को भी चकमा दे रहा है। यही कारण है कि बूस्टर डोज लगवाने वाले भी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इससे चिंतित विशेषज्ञों अब कह रहे हैं कि कोरोना वायरस सिस्टम से भी ज्यादा स्मार्ट हो गया है।

कोरोना वायरस की दस्तक एक बार फिर से जिले में हो गई है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि, इस बार मिले मरीजों में वायरस का कौन सा स्वरूप संक्रमण फैला रहा है, इसकी जानकारी अब तक नहीं हो पाई है। लेकिन पिछले दिनों मिले मरीजों में छह वैरिएंट की पुष्टि हो चुकी है। इनमें कई सब वैरिएंट भी शामिल हैं, जो लोगों की मौत का कारण भी बने हैं।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वायरस की संरचना में लगातार बदलाव हो रहा है। अब तक वायरस के छह वैरिएंट मिल चुके हैं। इनमें अल्फा, बीटा, डेल्टा, गामा और ओमिक्राॅन शामिल हैं। यह वैरिएंट इतने स्मार्ट हो गए हैं कि वैक्सीन भी इन पर असरदार साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि बूस्टर डोज लगवाने के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं। कुल मिलाकर यह वायरस सिस्टम से ज्यादा स्मार्ट हो गया है।

 
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डॉ अमरेश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
70 से 80 प्रतिशत वैक्सीन नहीं दे पा रही सुरक्षा
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वायरस की संरचना में हुए बदलाव की वजह से वैक्सीन 70 से 80 प्रतिशत शरीर को सुरक्षित नहीं कर पा रही है। क्योंकि, जब वैक्सीन बनाई गई थी तो उस समय पुराने स्ट्रेन का प्रभाव देश और दुनिया में था। उसी स्ट्रेन के अनुसार वैक्सीन बनाई गई, लेकिन समय बीतने के साथ वायरस की संरचना में बदलाव हुआ तो वैक्सीन का असर भी कम हो गया। यही कारण है कि बूस्टर डोज लगवाने वाले लोग भी संक्रमित हो रहे हैं।

 
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कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा प्लस - फोटो : iStock
डेल्टा और ओमिक्रॉन ने मचाई थी तबाही
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि पहली लहर में कोरोना वायरस का अल्फा वैरिएंट मिला था। इस लहर में कम मौतें हुई थी। लेकिन, जब दूसरी लहर आई तो डेल्टा, बीटा और ओमिक्रॉन मिला। इसमें डेल्टा और ओमिक्रॉन ने जबरदस्त तबाही मचाई थी। 60 फीसदी मौतें जिले में ओमिक्राॅन और 40 फीसदी में डेल्टा, बीटा और गामा से मौत हुई थी। इसी वैरिएंट ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई थी।

 

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ओमिक्रॉन - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन का सब वैरिएंट बी-6 मिल रहा इस वक्त
इस वक्त देश भर में ओमिक्राॅन का सब वैरिएंट बी-6 मिल रहा है। यह वैरिएंट अब तक इतना खतरनाक नहीं साबित हुआ है, जितना अब तक ओमिक्रॉन के अन्य सब वैरिएंट रहे हैं। इससे पहले ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट बी-1.1 मिला था, जो ज्यादा खतरनाक था। यह दूसरी लहर में सबसे अधिक लोगों में मिला था।

 
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(सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
वैक्सीन लगवाने के बाद एक साल तक प्रतिरोधक क्षमता
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वैक्सीन लगवाने के बाद एक साल तक प्रतिरोधक क्षमता रहती है। इसके बाद वैक्सीन का असर धीरे-धीरे कम हो जाता है। बूस्टर डोज लगवाए भी लोगों को ज्यादा समय बीत चुका है। ऐसी स्थिति में वैक्सीन का असर भी धीरे-धीरे कम हो गया है। ऐसी स्थिति में एक ही उपाय है कि लोग मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। इसी से ही कोरोना से बचा जा सकता है।
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