बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
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जानकारी के अनुसार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शासन की ओर से एक डेथ ऑडिट कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने जब कोरोना से होने वाली मौतों के संबंध में जांच पड़ताल की तो पता चला कि कोविड के लक्षण होने के बावजूद लोग सामान्य तरीके से इलाज कराते रहे। जब मरीज की हालत गंभीर हुई तो मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इनमें 40 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जो हाई रिस्क श्रेणी में थे, जबकि 20 प्रतिशत ऐसे थे, जिन्हें सांस लेने में ज्यादा तकलीफ थी। ऐसे मरीजों को मेडिकल कॉलेज लाने में देरी की गई। कई मरीज तो होम आईसोलेशन में रहे, जिससे उनकी मौत हो गई। जिले में ऐसे मरीजों की संख्या 12 से अधिक है।