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खास खबर: कोरोना के नए नए स्ट्रेन की जांच के लिए यहां भेजे जाएंगे सैंपल, जानिए क्या है बड़ी वजह

Thu, 25 Feb 2021 03:43 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
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कोरोना का नया खतरा - फोटो : iStock
कोरोना के नए स्ट्रेन की जांच के लिए गोरखपुर जिले में लिए गए नमूने बीएचयू वाराणसी और केजीएमयू लखनऊ भेजे जाएंगे। वजह, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जीन सीक्वेसिंग जांच की सुविधा नहीं है। जीनोम सीक्वेसिंग की जांच काफी महंगी है, इसलिए अभी प्रदेश के दो सेंटरों पर ही जांच की अनुमति दी गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
बता दें कि प्रदेश सरकार ने अपने निर्देश में कहा है कि मुंबई, ब्रिटेन, अफ्रीका और ब्राजील आदि जगहों से आए लोग यदि पॉजिटिव मिलते हैं तो इनके जीनोम सीक्वेसिंग के लिए गए नमूने बीएचयू या केजीएमयू भेजे जाएं। इन केंद्रों पर जीन सीक्वेसिंग की जांच होगी।
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डॉ. अमरेश सिंह।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन मिले हैं। महाराष्ट्र, केरल, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश आदि में कोरोना के केस भी बढ़े हैं। इस वजह से सख्त निर्देश मिले हैं कि जो भी लोग बाहर से आ रहे हैं, उनकी जांच हर हाल में की जाए। अगर वह पॉजिटिव मिलते हैं, तो उनके सैंपल जांच के लिए बीएचयू और केजीएमयू भेजा जाए। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती है, तब तक पॉजिटिव आने वाले व्यक्ति और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर निगाह रखी जाए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
क्या है जीनोम सीक्वेसिंग
डॉ. अमरेश सिंह के मुताबिक जीनोम सीक्वेसिंग एक तरह से वायरस का बॉयोडाटा होता है। वायरस कैसा है और किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है। वहीं, स्ट्रेन को वैज्ञानिक भाषा में जेनेटिक वैरिएंट कहते हैं। सरल भाषा में इसे अलग-अलग वैरिएंट भी कह सकते हैं। इनकी क्षमता अलग-अलग होती है। इनका आकार और इनके स्वभाव में परिवर्तन अलग होता है।  
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि नए स्ट्रेन की जांच की सुविधा बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में नहीं है। यही वजह है कि जांच के लिए सैंपल बीएचयू और केजीएमयू भेजने के निर्देश मिले हैं। यह जांच काफी महंगी होती है। इसमें वायरस के जीनोम सीक्वेसिंग की जांच की जाती है। इससे वायरस के नए स्ट्रेन का पता आसानी से चल जाता है।
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