कोरोना संक्रमण का डर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए और भी ज्यादा परेशानी का सबब बना है। गुर्दे के गंभीर रोग और आनुवांशिक रोग थैलेसीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए खतरा ज्यादा है। ऐसे में डायलिसिस और ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले इन मरीजों की एंटीजन कीट से कोरोना जांच कराई जाती है। पॉजिटिव आने पर कन्फर्मेशन टेस्ट यानी आरटीपीसीआर जांच कराई जाती है। तब तक ऐसे मरीजों को बिना उपचार या ब्लड ट्रांसफ्यूजन के रहना पड़ रहा है।
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गोरखपुर जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस केंद्र पर आने वाले मरीजों को सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एक शेड्यूल यानी डायलिसिस छूटने पर ऐसे मरीजों की जान पर बन सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक अरुण यादव के अनुसार बीते एक सप्ताह में तीन मरीजों की एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन मरीजों को डायलिसिस नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे अन्य मरीजों को संक्रमित होने की संभावना बहुत ज्यादा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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इन मरीजों को कन्फर्मेशन के लिए आरटीपीसीआर जांच कराई गई है। इसकी रिपोर्ट चार से पांच दिन में आती है। रिपोर्ट निगेटिव आने पर डायलिसिस की जाएगी। आरटीपीसीआर जांच में पॉजिटिव आए एक मरीज को पहले इलाज कराने की सलाह दी गई है।
आनुवांशिक बीमारी थैलेसीमिया में भी मरीज को एक से डेढ़ माह में रक्त चढ़ाना पड़ता है। इन मरीजों की भी रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्ति के मुकाबले कम होती है, क्योंकि उन्हें ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ कुछ दवाएं भी दी जाती हैं। हालाकि जिले में थैलेसीमिया के मरीज कम ही हैं लेकिन इन्हें भी ट्रांसफ्यूजन से पहले कोरोना की जांच करानी पड़ती है। अच्छी बात यह है कि अभी तक कोई थैलेसीमिया रोगी कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया गया है।