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तस्वीरें: कॉलेज के दिनों में ऐसे दिखते थे सीएम योगी, जानिए किस वजह से छोड़ा था घर

Wed, 30 Sep 2020 03:11 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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योगी आदित्यनाथ अपने मित्र संदीप बिष्ट के साथ ऋषिकेश में।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
योगी आदित्यनाथ स्कूल के दिनों से ही विद्यार्थी परिषद के कार्मचारी के रूप में काम करते थे। शायद यही वजह थी कि उन्हें शुरू से हिंदुत्व के प्रति लगाव था। वह अक्सर वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लिया करते थे। विद्यार्थी परिषद का कोई भी कार्यक्रम होता था तो तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाता था।
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अपने सहपाठियों के साथ कालागढ़ के रास्ते में योगी आदित्यनाथ, बायें से प्रथम।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
एक बार ऐसे ही कार्यक्रम में देश भर से आए कई छात्रों ने अपनी बात रखी। जब योगी ने अपनी बात रखनी शुरू की तो लोगों ने खूब सराहना की। भाषण सुन महंत अवैद्यनाथ बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को अपने पास बुलाया और पूछा, कहां से आए हो, तब उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड के पौड़ी के पंचूर से आए हैं। उन्होंने कहा कि कभी मौका मिले तो मिलने गोरखपुर जरूर आओ।
 
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ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ व योगी आदित्यनाथ।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
महंत अवैद्यनाथ भी उसी उत्तराखंड के रहने वाले थे। उनका गांव भी योगी के गांव से 10 किलोमीटर दूर था। उस पहली मुलाकात से योगी बहुत प्रभावित हुए। उस मुलाकात के बाद योगी अवैद्यनाथ से मिलने गोरखपुर आए। कुछ दिन रुकने बाद वह फिर अपने गांव लौट गए।

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अपने दोस्तों के साथ योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
वहां जाकर उन्होंने ऋषिकेश में ललित मोहन शर्मा कॉलेज में एमएससी में दाखिला ले लिया, पर उनका मन गोरखपुर स्थित गुरु गोरखनाथ की तप: स्थली की तरफ हमेशा घूमता रहता था। इसी बीच महंत अवैद्यनाथ बीमार पड़ गए। योगी उनसे मिलने पहुंचे। तब अवैद्यनाथ महाराज ने उनसे कहा कि हम रामजन्म भूमि पर मंदिर के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं, इस हाल में हूं यदि मुझे कुछ हो गया तो मेरे मंदिर को देखने वाला कोई नहीं होगा।
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अपने बचपन के साथियों के साथ योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
योगी ने उनसे कहा कि आप चिंता न करें आप को कुछ नहीं होगा। मैं गोरखपुर जल्द आऊंगा। थोड़े दिन बाद अपनी मां को गोरखपुर जाने की बात कह कर घर से चल दिए। तब मां ने सोचा था बेटा शायद नौकरी के लिए जा रहा है। यह कह कर वह 1992 में गोरखपुर आ गए।

(साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से ली गई है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।)

 
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