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सीएम योगी को देखकर फूट-फूटकर रोने लगी थीं मां, तब पिता ने कही थी ये बात

Wed, 22 Apr 2020 12:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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सीएम योगी का परिवार। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट ने दिल्ली एम्स में रविवार को अंतिम सांस ली। सीएम योगी को जब उनके पिता ने पहली बार संन्यासी रूप में देखा तो उन्हें एक बार विश्वास नहीं हुआ। उस समय महंत अवैद्यनाथ की बात सुनकर तो वे कुछ नहीं बोले लेकिन घर पहुंचने के बाद उन्होंने ये बात सीएम योगी की मां से बताई। आगे की कहानी जानने के लिए पढ़ें अगली स्लाइड्स...
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सीएम योगी की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
सीएम योगी के संन्यासी बनने की बता सुनकर उनकी मां को यकीन नहीं हुआ। वह तुरंत योगी आदित्यनाथ के पिता को साथ लेकर गोरखपुर के लिए निकल पड़ीं। गोरखनाथ मंदिर अपने बेटे को संन्यासी वेष में देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगीं। इस दौरान उनके पिता ने उन्हें समझाया कि अब यहीं से लोगों का कल्याण होना है। यह रोने का समय नहीं है।
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सीएम योगी के स्कूल के दिनों की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
माता-पिता को देखकर योगी भी भावुक हो गए लेकिन उन्होंने मन के ज्वार को रोके रखा। मंदिर से विदा करते समय उन्होंने मां से कहा, ‘छोटे परिवार से बड़े परिवार में मेरा एक संन्यासी के रूप में मिलन है। उसी रूप में जीवन जी रहा हूं।’

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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
पीठाधीश्वर अवैद्यनाथ ने भी उन्हें समझाया और कहा कि योगी पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वह जब चाहे, आप लोगों के पास जा सकते हैं। आप भी जब चाहे यहां आ सकती हैं, रह सकती हैं। आपका सदैव स्वागत है।
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सीएम योगी बनने के बाद पहली बार अपने गांव जाते हुए। - फोटो : अमर उजाला।
चार वर्ष बाद आदित्यनाथ ने संन्यासी के रूप में पंचूर की पहली यात्रा की। यह यात्रा संन्यासी जीवन का एक महत्वपूर्ण विधान पूरा करने के लिए था। उन्हें अपने माता-पिता से संन्यासी के रूप में भिक्षा लेनी थी।
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सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।
माता पिता ने अपने संन्यासी पुत्र को भिक्षा के रूप में चावल, फल और सिक्के दिए। इस दौरान भी उनके परिवार वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कहा कि मैं यहां रहने नहीं, भिक्षा लेने आया हूं। 14 जनवरी 1994 को आदित्यनाथ दीक्षा लेकर तथा योगी की सभी क्रियाओं को पूरा कर 'योगी आदित्यनाथ' बन गए। भक्त वहीं से उन्हें छोटे महाराज की उपाधि देकर संबोधित करने लगे।

साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।


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