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Chhath Puja 2020: कल से शुरू होगा चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व छठ, महिलाओं ने शुरू की तैयारी

Tue, 17 Nov 2020 12:21 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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chhath puja: फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
सूर्य की उपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। 19 नवंबर को खरना, 20 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और 21 को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिनों के पर्व का समापन होगा। दिवाली के छह दिनों के बाद यह महापर्व मनाया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं ने इसके लिए अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छठ पूजा तेजस्वी पुत्रों की प्राप्ति उनकी दीर्घायु, सुख, आरोग्य और ऐश्वर्य के लिए की जाती है। भैया दूज के तीसरे दिन से शुरू होकर यह पर्व चार दिनों तक चलता है। पर्व को लेकर नदी और तालाब पर जहां घाट बनने शुरू हो गए हैं, वहीं बाजार में सामान दउरा, सूप के साथ अन्य पूजन सामग्रियों के बाजार भी सजने लगे हैं।
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chhath puja: फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
पहला दिन: नहाय खाय, 18 नवंबर को
नहाय-खाय के अंतर्गत व्रती महिलाएं नदी, तालाब आदि में जाकर स्नान करेंगी। घर आकर खाना बनाएंगी। खाने में कद्दू व चावल बनाया जाता है। श्रद्धालु इसे कद्दू भात कहते हैं। नहाय खाय के दिन अरवा चावल, चने की दाल एवं कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन ग्रहण करते हैं।

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chhath puja: फाइल फोटो। - फोटो : PTI
दूसरा दिन : खरना 19 नवंबर
इस दिन व्रती महिलाएं उपवास करेंगी। शाम को पूजा करने के उपरांत व्रत का पारण करेंगी। व्रत खोलने में नैवेद्य और प्रसाद का उपयोग करेंगी। दिनभर उपवास रखकर शाम तक सूर्य भगवान की पूजा करने के पश्चात खीर पूड़ी का भोग लगाकर हवन किया जाता है।
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chhath puja: फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य 20 नवंबर
इस दिन व्रती दिनभर व्रत रखकर अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगी। शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को तालाब या नदी में अर्घ्य देंगी। आटे का ठेकुआ और विभिन्न प्रकार के फल प्रसाद रखेंगी तथा उसे सूर्य नारायण और छठ माता को अर्पित करेंगी। इसे सूप और डलिया में ढोने का पौराणिक महत्व है। इसे ढोने का कार्य व्रती महिला के पति या पुत्र करते हैं। वह इसे जलाशय तक ले जाते हैं। शाम को महिलाएं सूर्य की पूजा करती हैं। उन्हें जल और दूध का अर्घ्य प्रदान करती हैं।
 
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chhath puja: फाइल फोटो। - फोटो : PTI
चौथा दिन : उगते हुए सूर्य को अर्घ्य 21 नवंबर
इस दिन व्रती ब्रह्म मुहूर्त में नई अर्घ्य सामग्री लेकर जलाशय में खड़ी होकर अरुणोदय की प्रतीक्षा करेंगी। जैसे ही क्षितिज पर अरुणिमा दिखाई देगी, वह मंत्रोच्चार के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद वह व्रत का पारण करेंगी।
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ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
व्रत मात्र से मिलता है पूरा फल
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, वैसे तो हर पूजा व्रत में बहुत सी पूजन सामग्रियों का विधान है लेकिन ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। सामग्री की व्यवस्था अपने सामर्थ्य के अनुसार ही की जा सकती है। कुछ न रहने पर व्रत मात्र से ही छठ के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। पूजन बस विधि-विधान से सही और उचित होना चाहिए। सूर्य षष्ठी व्रत पूजन में गन्ना, नारियल, आम का पल्लव, पान, सुपारी, फल, लौंग, इलायची गुण, रुई, चौमुखी दिया, सूप, दउरा, रोली, साठी चावल, अगरबत्ती, कपूर, चूड़ा, सरसों तेल, आलता, नींबू बड़ा व छोटा, आटे का ठेकुआ, मूली, कद्दू, हल्दी, अदरक, सुथनी, पंचमेवा, देसी घी तथा सभी प्रकार के फलों का इस्तेमाल होता है।
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अनुराधा मिश्रा, इंदु सिंह, पुष्पा श्रीवास्तव व ललिता श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला।
  • दाउदपुर की पुष्पा श्रीवास्तव ने बताया कि संतान की मनोकामना से छठ माता के व्रत का अनुष्ठान किया था। मां ने संतान देकर गोद भर दी। मन्नत पूरी होने के बाद से ही विधि-विधान से छठ पर निर्जल उपवास रखती हूं।
  • रुस्तमपुर की अनुराधा मिश्रा ने बताया कि छठ माता अपने भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती हैं। सच्ची आस्था और मां पर विश्वास से मेरी मन्नत पूरी होती है। इसलिए प्रत्येक वर्ष छठ व्रत का बेसब्री से इंतजार रहता है।
  • असुरन चौक की ललिता श्रीवास्तव ने बताया कि छठ माता के प्रति पूरे परिवार की गहरी आस्था है। 34 सालों से ये व्रत कर रही हूं। छठ माता से आज तक जो भी मांगा, उन्होंने पूरा किया है। जबतक जीवन है इस व्रत को करती रहूंगी।
  • बिछिया की इंदु सिंह ने बताया कि जो भी है वह छठ मैया का दिया हुआ है। छठ माता से सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। उपवास रखकर मां की पूजा करूंगी और परिवार की खुशहाली की कामना करूंगी।
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