आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। यह कहानी आजादी से पहले की है। यहां चौरीचौरा में जनविद्रोह से ब्रिटिश हुकूमत हिल उठी थी। लोगों के आक्रोश को भांपते हुए गोरखपुर के तत्कालीन कमिश्नर ने इंडिया होम दिल्ली को तार भेजकर एक कंपनी मिलिट्री भेजने की मांग की थी। वहीं सरकार के गृह विभाग दिल्ली ने सभी स्थानीय सरकारों और प्रशासन को तार भेजकर हवाई फायरिंग पर तत्काल रोक लगाने को कहा था।
उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार की ओर से इससे संबंधित दस्तावेज के मुताबिक, आठ फरवरी 1921 को गांधी जी पहली बार गोरखपुर आए। इसके बाद यहां से बड़ी संख्या में लोग उनके असहयोग आंदोलन से जुड़ने लगे। जिले के कांग्रेसी उस समय अपने को 'राष्ट्रीय कार्यकर्ता' कहते थे। आंदोलन से प्रभावित लोगों ने सरकार की शराब की दुकानों का बहिष्कार कर दिया। साथ ही अंग्रेजों को उनके राजस्व का एक प्रमुख जरिया ताड़ी (ताड़ के पेड़ से प्राप्त होने वाला रस) देना बंद कर दिया। बड़ी संख्या में लोग आयातित वस्त्रों को छोड़कर गांधी टोपी और खादी के कपड़ों का इस्तेमाल करने लगे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...