फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति में यहां बनाई थी छावनी, सैकड़ों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर दी थी मौत की सजा

Sun, 20 Dec 2020 01:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
विज्ञापन
1 of 5
majhauli raj kila - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे देवरिया जनपद के भी रणबांकुरों ने देश की आजादी के लिए हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है। बिहार सीमा से सटे मझौलीराज में तो 1857 की क्रांति को असफल करने के लिए अंग्रेजों को अपनी छावनी तक बनानी पड़ी। सैकड़ों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर सजा दी गई। मझौलीराज का किला आज भी उस ऐतिहासिकता की याद दिलाता है।

 
विज्ञापन

2 of 5
majhauli raj kila - फोटो : अमर उजाला।
उस दौरान देवरिया के मझौलीराज के राजा उदय नारायण मल्ल की मित्रता अंग्रेजों से थी। अंग्रेजी सेना ने 1857 की क्रांति को कुचलने के लिए यहां पर एक छावनी स्थापित कर दी। इसके बाद क्रांति विरोधी गतिविधियों को यहीं से संचालित किए जाने लगा। मझौलीराज के राजा उदय नारायण मल्ल ने क्रांति की सूचना अंग्रेजों को दे दी। इसके कारण यहां स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या, बल तथा जोश की अधिकता के बावजूद पराजय का सामना करना पड़ा। लार के बाबू भवन सिंह के नेतृत्व में हजारों विद्रोही सिपाहियों ने सोहनपुर में अंग्रेजी सेना के साथ भयंकर युद्ध किया।
विज्ञापन

3 of 5
majhauli raj kila - फोटो : अमर उजाला।
नवंबर 1857 के प्रारंभ में भवन सिंह ने धरमेर के विजय बहादुर मल्ल, भवन सिंह के पुत्र गोपाल सिंह, लार के रामनाथ कुशवाहा, बरडीहा के गोविंद सिंह, अमर सिंह, के साथ मिलकर मझौली किले पर चढ़ाई की योजना बनाई। इस योजना से गोरखपुर-देवरिया के नायब नाजिर मुशर्रफ खान, पटना के मौलवी करीम व कुंवर सिंह के भाई हरिकिशुन सिंह को भी अवगत कराया।

4 of 5
majhauli raj kila - फोटो : twitter @PiyushGoyal
इस अभियान में भवन सिंह के साथ पैना के ठाकुर सिंह, शिवव्रत सिंह, पलटन सिंह, शिवजोर सिंह भी अपने साथियों के साथ सम्मिलित थे। मुशर्रफ खान के साथ बेनीमाधव सिंह के भाई संभर सिंह, करकाबार के धरम सिंह, भानपुर के जमींदार बाबू गोविंद बल्लभ सिंह व उनके सहयोगी, चिल्लपुर के राजा, शिवपुर परगना अमोढ़ा के जमींदार सूर्य सिंह, राजा किशन किशोर चंद्र, राजा रघुवीर सिंह, मुनवान सिंह, धरमेर के राजपूत, वाजिद मुहम्मद टिलजी, नवाब सिंह, गुलराम शाह, नवाब मुहम्मद टांसी, दौलत अली, शेर अली, रियासत अली, जाकिर हुसैन, विरजिस कदर, जफर अली, दोस्त अली, नारायण दयाल, संग्राम लाल, सरायमीर के मनसब अली, बल्ली सिंह, पृथ्वीपाल सिंह, अमोढ़ा की रानी भी मझौलीराज की इस लड़ाई में सम्मिलित हो गए थे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
majhauli raj kila - फोटो : अमर उजाला।
कुछ क्रांति के सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उन्हें सजा दी गई। अन्य क्रांतिकारियों को पकड़वाने के लिए पुरस्कार की घोषणा की गई, ताकि क्रांति को दबा दिया जाए, किंतु इसमें अंग्रेजों को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। मझौली युद्ध के बाद जब सभी क्रांतिकारी वापस चले गए तब अंग्रेजों ने क्रांति के सूत्रधारों को पकड़ने के लिए दमन व अत्याचार का मार्ग चुना। इस युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले पैना के जमींदारों के 24 गांव नीलाम कर दिए गए। कर्नल रोक्राफ्ट के नेतृत्व में सलेमपुर के समीप अहिरौली लाला के नारायण दयाल कानूनगो व उनके भतीजे संग्राम लाल के घर को 27 दिसंबर 1857 को क्रांतिकारियों की मदद करने के आरोप में उड़ा दिया गया। यहां के विद्रोहियों ने अप्रतिम साहस व शौर्य का प्रदर्शन करते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया और जनता के मन में अंग्रेजी शासन के प्रति विद्रोह की अलख जगाने में सफल रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें