उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ब्लैक फंगस के बढ़ते मरीजों के बीच राहत भरी खबर है। मंगलवार को फंगस से जूझ रहे होम्योपैथिक चिकित्सक को डिस्चार्ज कर दिया गया। वह घर चले गए हैं। उनकी हालत में काफी सुधार है। बीते 26 मई को उनका ऑपरेशन हुआ था। जबकि एक और महिला का ऑपरेशन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में किया गया है।
मेडिकल कॉलेज के पास स्थित फतेहपुर की महिला को 25 मई को भर्ती किया गया था। महिला की बाईं नाक व आंख तक संक्रमण फैल गया था। डॉक्टरों ने बिना देरी किए मंगलवार को करीब ढाई घंटे ऑपरेशन कर फंगस को निकाला।
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ब्लैक फंगस का ऑपरेशन करते चिकित्सक।
- फोटो : prayagraj
टीम में ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. आर्यन यादव, डॉ. पीएन सिंह, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जायसवाल मौजूद रहे। दोनों विभागों की टीम ने महिला के नाक व आंख के पिछले हिस्से में पहले फंगस को साफ किया। इसके बाद घाव पर एंटीफंगल दवाई लगाई।
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
नेत्र रोग विभाग की टीम ने आंख के पिछले हिस्से में बने घाव पर एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन लगाया। बीआरडी में यह फंगस का पांचवां ऑपरेशन है। इससे पहले चार मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं। इसमें एक महिला को छोड़कर सभी की हालत ठीक है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी में संभव है ब्लैक फंगस का इलाज
ब्लैक फंगस का इलाज बीआरडी में संभव है। फंगस से जूझ रहे महराजगंज के रहने वाले 62 साल के होम्योपैथिक चिकित्सक बीआरडी से डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। संक्रमित होने के साथ वह शुगर के भी मरीज थे।
करीब एक पखवारे पहले उनके नाक व आंख में परेशानी शुरू हुई थी। 10 दिन पहले उन्हें बीआरडी में भर्ती कराया गया था। फंगस की पुष्टि के बाद उनका ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद फंगस वाली जगह पर एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन लगाया गया था। यह बेहद कारगर रहा।