ऑटो में बच्चे का शव
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देर रात पुलिस को होश आया कि अगर ये खबर अखबारों में विस्तार से छप गई तो बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। रात करीब एक बजे एसपी नार्थ अरविंद पांडेय ने शहर के प्रमुख अखबारों से संपर्क साधना शुरू किया। यह वह वक्त था, जब ज्यादातर अखबारों के संस्करण छूट चुके थे। जिन अखबारों के संस्करण नहीं छूटे थे, या प्रिटिंग चल रही थी, उन्होंने एक बच्चे की जान की खातिर मशीन रोककर जो भी संभव था किया, मगर समय से चेतने से जो फायदा हो सकता था, उसे पुलिस ने गंवा दिया।