अब तालाब में ऑक्सीजन की कमी से मछलियां नहीं मरेंगी। ऑक्सीजन की कमी होते ही, इंटरनेट ऑफ थिंक (टीओपी) सेंसर सक्रिय हो जाएगा। संदेश मिलते ही तालाब में लगाए गए स्प्रिंकल से कृत्रिम बारिश होने लगेगी। जो तालाब में ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य होने तक जारी रहेगी। इस तकनीक को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने विकसित किया है। विश्वविद्यालय पायलट प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से देवरिया व कुशीनगर में इसकी शुरूआत करने जा रहा है।
दरअसल, गर्मी बढ़ते ही तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। जिसके चलते मछलियां मरने लगती है। मछली पालकों को इसकी जानकारी तब होती है, जब मछलियां मरकर ऊपर तैरने लगती हैं। लेकिन, एमएमएमयूटी की ओर से विकसित इस तकनीक से ऑक्सीजन की मात्रा पहले ही पता चल जाएगी और समय रहते पानी में आक्सीजन का स्तर बेहतर कर दिया जाएगा।