निर्भया संवाद में हिस्सा लेती छात्राएं।
- फोटो : राजेश कुमार
अंचल शुक्ला, मनीषा यादव व अर्पिता का तर्क था कि हम जितना भी कानून सख्त बना लें जब तक सोच नहीं बदलेगी, कुछ भी नहीं होने वाला है। वे बेबाकी से कहती हैं कि अपराध का जन्म तो घर से ही होता है। कपड़े देखकर लड़कियों के चरित्र का अनुमान लगाने वाली सोच को बदलने की जरूरत है। इस बदलाव में सभी को योगदान देना होगा तभी महिलाओं के प्रति पुरुषों में अच्छी सोच विकसित होगी।