बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल फोटो)
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गोरखनाथ मंदिर का रूप आकार प्रकार, समय-समय पर परिस्थितियों और सुविधाओं के अनुसार बदलता रहा है। शिव गोरक्ष की ओर से त्रेता युग में अखंड ज्योति जलाई गई थी, जो आज तक अखंड रूप से जल रही है। यह अखंड ज्योति गोरखनाथ मंदिर के अंतरवर्ती भाग में हैं। मंदिर में ही गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ है। इसमें विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क रहने, भोजन व अध्ययन की पूरी व्यवस्था हैं। एक आयुर्वेद महाविद्यालय व धर्मार्थ चिकित्सालय, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् स्थापना की गई। परिषद् की ओर से कई हॉस्टल भी खोले गए हैं।