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Exclusive: पूर्व राष्ट्रपति के प्रपौत्र के घर रखी है 300 साल पुरानी फारसी में लिखी रामायण, अब लग रहे दीमक

Tue, 05 Sep 2023 10:48 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

रामायण में करीब 250 पन्ने हैं और इसे हाथ से लिखा गया है। जहां-जहां राम-सीता का जिक्र है वहां लाल स्याही और बाकी जगह पर काली स्याही का इस्तेमाल हुआ है। इसका कवर पृष्ठ करीब नष्ट हो चुका है, लेकिन उसके टुकड़ों को संजोकर रखा गया है।
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डॉ अशोक के घर फारसी में लिखी रामायण है। - फोटो : अमर उजाला।
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र डॉ. अशोक कुमार के घर पर 300 साल पुरानी फारसी में लिखी गई रामायण मौजूद है। इसके कुछ पन्ने फट गए हैं और अब दीमक भी लगने लगी है। रामायण के हर पेज पर सोने के पानी से हाशिए बनाए गए हैं और चित्रों में मुगलकालीन व राजस्थानी चित्रकारी के मिश्रण की झलक भी है। डॉ. अशोक अब इस रामायण को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय को सौंपने जा रहे हैं। इसे लेकर उनकी बातचीत भी हो चुकी है।

शहर के पहले बैरिस्टर मुंशी राम सहाय फारसी के विद्वान थे। वे मिर्जापुर में रहते थे। उस दौरान यह इलाका जंगल का था और देवरिया से तीन परिवार बसने आए थे। मुंशी राम सहाय ने सन 1706 में इस रामायण को फारसी में अनुवाद कराया था। यह वाल्मीकि रामायण का अनुवाद है। उनकी सातवीं पीढ़ी में डॉ. अशोक कुमार और उनके भाई हर्ष प्रसाद ने बेतियाहाता स्थित अपने आवास में इस रामायण को संभाल कर रखा है।

 
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डॉ अशोक के घर फारसी में लिखी रामायण। - फोटो : अमर उजाला।
डॉ. अशोक कुमार बताते हैं, जब रामायण के पन्नों के कुछ हिस्से फटने लगे तो उनके दादा, डिप्टी जेलर रहे शारदा प्रसाद ने फिर से बाइंडिंग कराई। जब मुगल शासकों ने हिंदू धार्मिक पुस्तकों को नष्ट कराना शुरू किया, तब इसे तहखाने में सुरक्षित रखा गया था। रामायण में इस्तेमाल किए पन्नों को नमी से बचाने के लिए एक एयरटाइट बाॅक्स में रखा गया है।

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डॉ अशोक के घर फारसी में लिखी रामायण है। - फोटो : अमर उजाला।
फारसी में लिखे गए इस रामायण में जटायु के भाई संपाती को तीर मारते श्रीराम, अशोक वाटिका में त्रिजटा से बातचीत करतीं सीता और युद्ध के दौरान लंकापति रावण की तस्वीर में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। हरियाली दिखाने के लिए घास को पीसकर निकाले गए रंग से पेंटिंग हुई है।

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डॉ अशोक के घर फारसी में लिखी रामायण है। - फोटो : अमर उजाला।
रामायण लिखते समय कोई गलती हुई तो उसे हाशिए में दर्शाया भी गया है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय के लोगों से बात हुई है। जल्द ही वे आने वाले हैं। उन्हें रामायण सौंप दूंगा ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहे और देश-दुनिया के लोग इसके बारे में जान सकें।


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डॉ अशोक के घर फारसी में लिखी रामायण है। - फोटो : अमर उजाला।
जहां राम-सीता का जिक्र वहां लाल स्याही का इस्तेमाल
रामायण में करीब 250 पन्ने हैं और इसे हाथ से लिखा गया है। जहां-जहां राम-सीता का जिक्र है वहां लाल स्याही और बाकी जगह पर काली स्याही का इस्तेमाल हुआ है। इसका कवर पृष्ठ करीब नष्ट हो चुका है, लेकिन उसके टुकड़ों को संजोकर रखा गया है।
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