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Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि में हर महिला को करना चाहिए 16 श्रृंगार, ये रही इसके पीछे की खास वजह

Sat, 28 Sep 2024 09:36 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नवरात्रि 2024 16 श्रृंगार - फोटो : Istock
किसी भी त्योहार में महिलाओं के सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। नवरात्रि में सोलह श्रृंगार महिलाओं के लिए अहम माना जाता है। दरअसल, मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की नवरात्रि में पूजा होती है। इस दौरान माता आपके घर पर वास करती हैं। देवी मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त भोग और अन्य तरीकों को अपनाते हैं। लेकिन मां को प्रसन्न करने के लिए एक आसान तरीका है घर की महिलाओं का सोलह श्रृंगार करके तैयार होना। नवरात्रि में मां दुर्गा का श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। इस मौके पर घर की महिलाओं को भी सोलह श्रृंगार करके ही माता की पूजा करनी चाहिए। इससे मां दुर्गा खुश होती हैं और आप पर अपनी कृपा बरसाती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि में महिलाओं के सोलह श्रृंगार के पीछे की वजह क्या है? चलिए जानते हैं कि महिलाओं को पूजा में 16 श्रृंगार करके ही क्यों शामिल होना चाहिए और इसका क्या लाभ होता है।
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नवरात्रि में16 श्रृंगार - फोटो : Istock
महिलाओं को क्यों करना चाहिए 16 श्रृंगार

कहते हैं कि सोलह श्रृंगार से घर परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है। मां दुर्गा सोलह श्रृंगार पसंद करती हैं। इसलिए जो भी महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, देवी मां उनपर और उनके परिवार पर हमेशा प्रसन्न रहती हैं। सोलह श्रृंगार घर में सुख और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है। धार्मिक और प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में भी सोलह श्रृंगार का जिक्र किया गया है। ऋग्वेद में कहा गया है कि सोलह श्रृंगार सिर्फ खूबसूरती ही नहीं भाग्य को भी बढ़ाता है। महिलाएं मां आदिशक्ति को खुश करने के लिए इस पावन पर्व पर ये श्रृंगार करती हैं। 
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नवरात्रि में 16 श्रृंगार - फोटो : Istock
कौन से हैं 16 श्रृंगार

16 श्रृंगार में अलग अलग 16 चीजों को शामिल किया गया है। इसमें लाल जोड़ा, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर, गजरा, काजल, मांग टीका, चूड़ियां, नथ, बाजूबंद, कानों के झुमके, पायल, अंगूठी, बिछिया, मंगलसूत्र और कमरबंद शामिल हैं। ये 16 चीजें पहन कर महिलाएं श्रृंगार करती हैं।

 

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नवरात्रि में 16 श्रृंगार - फोटो : Istock
16 श्रृंगार के हर एक श्रृंगार का है अर्थ

सोलह श्रृंगार का अपना ही अर्थ और महत्व है। हर एक श्रृंगार को आस्था से जोड़ा जाता है। जैसे बिंदी को भगवान शंकर के तीसरे नेत्र से जोड़कर देखा जाता है। सिंदूर का मतलब सौभाग्य और सुहाग की निशानी से है। पैरों में लगने वाला महावर और हथेली पर रचने वाली मेहंदी का अर्थ प्रेम से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा काजल का अर्थ बुरी नजर से बचाने से है।
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नवरात्रि में 16 श्रृंगार - फोटो : istock
नौ दिन के 9 रंगों का रखें ध्यान

अगर आप भी मां दुर्गा को खुश करने के लिए 16 श्रृंगार करने वाली हैं तो हर दिन के मुताबिक लकी रंगों का चयन करें। जैसे-

पहले दिन पीले रंग के कपड़े पहने
दूसरे दिन हरा रंग का परिधान पहने
तीसरे दिन ग्रे रंग का एथिनिक वियर पहने
चौथे दिन ऑरेंज कलर की साड़ी या सूट पहने
पाचवें दिन सफेद रंग का परिधान पहने
छठे दिन लाल रंग की साड़ी, सूट या लहंगा पहने
सातवें दिन दिन नीला रंग का कपड़ा पहने
आठवें दिन गुलाबी रंग का आउटफिट पहने
नौवें दिन जामुनी रंग के कपड़े पहने  
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