करण वाही
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
माना जाता है कि टेलीविजन शोज में जो दिखाया जाता है, वैसी जिंदगी अब होती नहीं है, आपका अनुभव क्या कहता है?
यह सही है कि टेलीविजन पर कुछ भी वास्तविक नहीं दिखाया जाता है। बहुएं सुबह मेकअप करके और गहने पहनकर कैसे उठ सकती हैं? इनका वास्तविकता से कुछ भी लेना देना नहीं है। टेलीविजन एक अलग माध्यम है, उनका अपना एक फॉर्मेट है। वह शायद एक जरूरत है जो दर्शकों को पसंद आता है। जब से ओटीटी आया है तब से लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं। ओटीटी पर एक नई कहानी देखने को मिलती है। हम जैसे कलाकारों को ओटीटी पर तैयारी करने का पूरा समय मिलता है जबकि टीवी में सेट पर ही स्क्रिप्ट मिलती है और हम अपने किरदार को लेकर कोई तैयारी नहीं कर पाते हैं।