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दूरदर्शन के इन कार्यक्रमों को भूल चुके होंगे आप, तब आवाज सुनते ही दौड़े चले आते थे बच्चे

Wed, 14 Apr 2021 06:39 PM IST
अमरीन हुसैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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दूरदर्शन के पुराने कार्यक्रम - फोटो : Social media

भारत में दूरदर्शन 60 बरस से भी ज्यादा का हो गया है। एक जमाने में जब मनोरंजन जगत आज की तरह सुदृढ़ और विलक्षित नहीं था और अपना एक रूप लेने की कोशिश ही कर रहा था उस वक्त दूरदर्शन ने कई ऐसे कार्यक्रम दे दिए, जिसकी स्मृति भारतीय दर्शकों के मस्तिष्क पर अब तक अमिट है। रामायण, महाभारत, शक्तिमान, मालगुड़ी डेज और गली-गली सिम सिम के किस्से व कहानियां तो आपने कई बार सुनी होंगी, लेकिन आज हम आपको यादों के उस झरोखे से भी परे ले चलेंगे।

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दूरदर्शन - फोटो : Doordarshan

आज हम दूरदर्शन की कुछ ऐसी नायाब सिग्नेचर ट्यून, लघु फिल्म और कार्यक्रम का जिक्र करेंगे, जिसकी यादें शायद आपके जहन के किसी कोने में धूमिल हो गई हों। इनमें सबसे पहले बात करेंगे खुद दूरदर्शन के सिग्नेचर ट्यून और मोंटाज की। इसकी धुन में एक खास तरह आकर्षण था, जिसे सुनकर ही दर्शक खिंचे चले आते थे। कहीं दूर से भी ये आवाज कानों में पड़ जाए तो मन उत्सुक हो उठता था कि हम भी थोड़ा टीवी देख लेते।


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ऑल इंडिया रेडियो - फोटो : All India Radio

ऑल इंडिया रेडिया यानी आकाशवाणी। 'बहुजनहिताय बहुजनसुखाय' के उद्देश्य से लाया गया आकाशवाणी 1957 में राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो प्रसारण के तौर पर पहचान बना रहा था। इस दौरान इस प्रथम रेडियो चैनल की विशेष प्रकार की धुन श्रोताओं का मन कौतूहल से भर देती थी। तब टीवी का युग शुरू नहीं हुआ था। इसलिए लोग आकाशवाणी के कार्यक्रमों का इंतजार किया करते थे। ये ट्यून एक बार फिर से यादों को ताजा कर देती है।

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एक अनेक और एकता - फोटो : FDI

फिल्म डिवीजन ऑफ इंडिया यानी एफडीआई की ओर से एक समय में प्रेरणादायक और रोचक एनिमेटेड शॉर्ट फिल्में बनाई गई थीं। समाज को सकारात्मक और प्रेरणायादयक संदेश देने के लिए कई छोटे-बड़े वीडियो बनाकर टीवी पर प्रसारित किए जाते थे। इनमें ‘ट्री ऑफ यूनिटी (1972)’, ‘एक चिड़िया अनेक चिड़िया (1974)’, और ’एक अनेक और एकता (1974) जैसी कई शॉर्ट फिल्में शामिल थीं, जिन्हें एनिमेशन के जरिए दिखाया गया था।

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द जंगल बुक - फोटो : Social media

दूरदर्शन पर 1993 में प्रसारित किए जाने वाले ‘जंगल बुक’ कार्यक्रम को आज भी कई लोग याद करते होंगे। उस समय की पीढ़ी के लोग भले ही अब बच्चे नहीं रहे मगर जब भी अपना बचपन याद करते होंगे तो उन्हें मोगली जरूर याद आता होगा। ‘जंगल जंगल बात चली है पता चला है…’ ये गाना सभी को अब भी गुदगुदा देता है।


 

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सिंदबाद जहाजी - फोटो : Social media

उस दौर के लोगों के लिए ‘सिंदबाद जहाजी’ भी काफी खास कार्यक्रम था। सीरियल का टायटल सॉन्ग ‘अगर मगर डोले नैय्या’ बच्चों में मानों तीव्र तरंग दैर्ध्य भर देता था। बीच समुद्र में सिंदबाद का मुकाबला जब डाकुओं से हुआ और हजार हाथियों के बराबर बलवान राक्षसों ने जब सिंदबाद पर आक्रमण किया तो बच्चे इतने खो जाते थे कि और किसी चीज का होश नहीं रहता था।

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गायब आया - फोटो : Social media
1990 में डीडी नेशनल पर एक एनिमेटेड टेलीविजन सीरीज शुरू की गई थी, जिसका नाम ‘गायब आया’ था। 10 भाग में प्रसारित की गई ये सीरीज लीड कैरेक्टर गायब के इर्द-गिर्द घूमती थी। इस कार्यक्रम का मोंटाज सुनकर तो बच्चे भागे चले आते थे।

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