महजबी सिद्दीकी
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इसके आगे महजबी सिद्दीकी ने लिखा, ‘इंसान जब गुनाह करता है तो उस गुनाह की लज्जत तो थोड़ी देर में खत्म हो जाती है, लेकिन गुनाह कयामत तक रहता है। मैंने महसूस किया कि मैं अपनी असल जिंदगी को भूलकर दुनिया के दिखावे वाली जिंदगी जी रही थी। अल्लाह की नाफरमानी करके इंसान को कभी सुकून नहीं मिल सकता है। आप चाहे लोगों को खुश करने के लिए कितना भी अच्छा कर लो और चाहे कितना भी वक्त दे दो, लोग आपकी कभी कद्र नहीं करेंगे।’