एमएस सुब्बुलक्ष्मी
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सिंगर की आवाज के फैन महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू भी थे। सुब्बुलक्ष्मी और उनके पति सदाशिवम आजादी की लड़ाई में भी अपने स्तर पर योगदान दिया करते थे। सिंगर अपनी गायकी से होने वाली कमाई कस्तूरबा फाउंडेशन को सौंप देती थीं। इसी सिलसिले में उन्हें महात्मा गांधी के संपर्क में आने का मौका मिला था। उनकी तारीफ करते हुए एक बार महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर सुब्बुलक्ष्मी गीत को बोलों के साथ न भी गाए, सिर्फ सुरों में गाए या फिर गाए भी नहीं, सिर्फ उच्चारित ही कर दें, तो भी किसी और के गायन के बजाय मैं उसे सुनना ही पसंद करूंगा। वहीं, जवाहर लाल नेहरू भी उनके प्रतिभा के कायल थे। उन्होंने सिंगर की तारीफ करते हुए कहा था, ''मैं क्या हूं! एक अदना सी प्रधानमंत्री और इस संगीत की मल्लिका के आगे मेरी क्या हैसियत है।''
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