शिव कुमार शर्मा
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कैसे बनी शिव-हरि की जोड़ी?
पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरि प्रसाद चौरसिया की म्यूजिकल जोड़ी को लोग ‘शिव-हरि’ की जोड़ी के रूप में जानते हैं। दोनों की जोड़ी बनाने में यश चोपड़ा का बड़ा हाथ है। इनकी दोस्ती और म्यूजिकल पार्टनरशिप तब शुरू हुई जब यश चोपड़ा ने उन्हें 1970 के दशक में फिल्मों के लिए संगीत रचना का सुझाव दिया। शिवकुमार और हरि प्रसाद चोपड़ा को बीआर चोपड़ा की फिल्मों में संगीत देने के कारण जानते थे। जब चोपड़ा स्वतंत्र निर्माता-निर्देशक बन गए, तो वे चाहते थे कि वे उनकी फिल्मों के आर्केस्ट्रा में शामिल हों। साल 1980 में, चोपड़ा ने उन्हें फिल्म ‘सिलसिला’ के लिए संगीत के लिए कहा, जिसे वह उस साल लॉन्च कर रहे थे। हालांकि, खय्याम ने पहले इस परियोजना को ठुकरा दिया था, इसलिए चोपड़ा शर्मा और चौरसिया के पास गए थे।
इस जोड़ी के शुरुआती काम में साल 1967 का कॉन्सेप्ट एल्बम ‘कॉल ऑफ द वैली’ शामिल है, जिसमें गिटारिस्ट बृज भूषण काबरा ने काम किया था। यह एल्बम गिटार के इस्तेमाल के मामले में काफी नया था और इसे अब तक रिकॉर्ड किए गए सबसे सफल भारतीय शास्त्रीय संगीत एल्बमों में से एक माना जाता है। इसके अलावा, शिवकुमार ने चौरसिया के साथ मिलकर कई हिंदी फिल्मों के लिए संगीत बनाए, जिसकी शुरुआत सिलसिला (1981) से हुई और उन्हें शिव-हरि संगीत जोड़ी के रूप में जाना जाने लगा। जिन फिल्मों के लिए उन्होंने संगीत तैयार किया उनमें से कुछ संगीतमय हिट रहीं, जैसे ‘फासले’ (1985), ‘चांदनी’ (1989), ‘लम्हे’ (1991) और ‘डर’ (1993)। अपने करियर में दोनों ने लंबे समय तक साथ काम किया और दोनों के बीच गहरी दोस्ती भी थी।