द मैरीड वूमन
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वेब सीरीज ‘द मैरीड वूमन’ के किरदार तो कमजोर हैं ही, आस्था को दर्शकों से सीधे बात कराने का प्रयोग भी अटपटा है। फोर्थ वॉल से बात करने की एक वजह होती है। यहां तो जो होते दिख रहा है, उसे अलग से भी बताने की जरूरत क्या है? और, जो कुछ परदे पर घट रहा है अगर उसे भी समझाने की जरूरत है तो फिर ऐसी सीरीज बनाने की जरूरत ही क्या है? सीरीज तकनीकी रूप से प्रभावित नहीं कर पाती है। कलाकारों में ऋद्धि डोगरा ने एक तरह से पूरी सीरीज अकेले अपने कंधों पर खींचने की कोशिश की है। इमाद शाह को अच्छे रोल चुनने चाहिए। मोनिका डोगरा की भी कास्टिंग यहां गड़बड़ है, वह पीपिलिका खान एक भी सीन में नहीं लग पाईं। पांच घंटे इस सीरीज में लगाने से बेहतर है कि मंजू कपूर की किताब फिर से पढ़ ली जाए।