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Tenet Review: नोलन के प्रशंसकों को मिली साल की सबसे बड़ी सिनेमाई सौगात, विलोमपद समझते हैं?

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टेनेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वार्नर ब्रदर्स की मार्केटिंग टीम को पता हो कि न हो लेकिन क्रिस्टोफर नोलन के प्रशंसकों की जो पूरी एक जमात हिंदी पट्टी में पिछले डेढ़-दो दशकों में तैयार हुई है, वह देश में मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स के फैन बेस से भी ज्यादा ताकतवर जमात है। पिछली सदी के आखिरी दशक या उसके दो चार साल पहले पैदा हुए बच्चों के लिए क्रिस्टोफर नोलन का दर्जा ऐसे फिल्म निर्देशक का है जिसे पाने के लिए दुनिया के तमाम निर्देशक अब भी कतार में हैं। भारतीय फिल्म निर्देशकों में फिलहाल कोई इस कतार में भी नहीं है। इन्हीं नोलन की नई फिल्म ‘टेनेट’ सिनेमाघरों तक आ पहुंची है। फिल्म देखने के लिए वैधानिक चेतावनी ये है कि इसके लिए आपको नोलन का सिनेमा समझ आना जरूरी है।
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टेनेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘टेनेट’ दो समय कालों की कहानी है। भविष्य के विनाशकों ने वर्तमान में कुछ ऐसा भेज दिया है जिसके सारे हिस्से मिल जाएं तो पृथ्वी की धुरी का कयामत वाला खेल खेला जा सकता है। एक बेनाम जासूस है जो इस काम में लगा हुआ है कि कैसे भविष्य, वर्तमान औऱ अतीत में चल रहे इस खतरनाक मकसद को रोका जाए और दुनिया को तबाह होने से बचा लिया जाए। इसके साथी तमाम हैं। ये टेनेट का अपना नेटवर्क है। दुनिया के हर कोने तक फैला हुआ। मामला थोड़ा सामान्य स्तर से ऊपर का है। अगर आपको पता हो कि रूस के सेटर स्क्वॉयर की खासियत क्या है और पैलिन्ड्रोम (विलोमपद) क्या होता है, तो ‘टेनेट’ समझना आपके लिए आसान होगा। वॉर्नर ब्रदर्स के साथ समस्या ये है कि वे फिल्में अच्छी बनाते हैं, लेकिन लक्षित दर्शक वर्ग तक इसे पहुंचाने के लिए संचार और संवाद के माध्यम उनकी टीम सही नहीं चुन पाती।
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टेनेट - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म ‘टेनेट’ किसी एक कलाकार की फिल्म नहीं है। यहां हर कलाकार दूसरे से इक्कीस होने की कोशिश में है। फुटबॉलर से अभिनेता बने जॉन डेविड वाशिंगटन के डीएनए में अदाकारी है। किरदार की जो चंचलता, चपलता और गंभीरता उनसे अपेक्षित थी, उस पर वह खरे उतरने में कामयाब रहते हैं। लेकिन, उनको सबसे बढ़िया साथ मिला है अभिनेता रॉबर्ट पैटिनसन का जो फिल्म का ग्राफ ही बदल देते हैं और दुष्टात्मा का कमाल चोला पहना है केनेथ ब्रनाघ ने। उनकी अदाकारी ने फिल्म को समय की गति समझने का एक नया आयाम दिया है।

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टेनेट - फोटो : ट्विटर
क्रिस्टोफर नोलन का सिनेमा एक अलग दुनिया का सिनेमा है। यहां आपको सिनेमा की समझ और बदलती दुनिया की उससे बेहतर समझ होना जरूरी है। यहां दिमाग साथ में लेकर भी आना होता है और उसे लगातार एक्टिव मोड पर रखना भी होता है। अगर आपने क्रिस्टोफर नोलन की ‘इंटरस्टेलर’, ‘इन्सेप्शन’ या फिर ‘मेमेंटो’ जैसी फिल्में देखी हैं तो आपको समझ आएगा कि दिमाग को एक्टिव मोड में रखकर सिनेमा देखने का अनुभव क्या होता है। ये मनोरंजन का एक ऐसा अनुभव है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है, बताया या लिखा नहीं जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे फिल्म ‘टेनेट’ के किरदार कहते हैं, ‘डोंट ट्राई टू अंडरस्टैंड इट। फील इट!!’ तो इस मामले में ‘टेनेट’ साल 2020 की विदाई का सबसे सही सिनेमा है, जाइए अंग्रेजी रिव्यूज के चक्कर में मत पड़िए, फील करिए।
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टेनेट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘टेनेट’ को मजबूती इसके कलाकारों की अदाकारी के साथ साथ इसकी तकनीकी टीम से भी मिलती है। नोलन की फिल्मों में हांस जिमर का संगीत सुनने की आदत डाल चुके लोगों के लिए सरप्राइज भी है, इस बार लूडविग योरॉनसन ने फिल्म की कहानी के हिसाब से बढ़िया समां बांधा है। साथ में आपको समय की गति के आगे, पीछे और ऊपर नीचे जाने का कमाल का अनुभव कराती है होइत वॉन होयेतमा की सिनेमैटोग्राफी। जेनिफर लेम की एडीटिंग सिनेमा का एक नया पैरामीटर सेट करती है। फिल्म ‘टेनेट’ सिनेमा के विद्यार्थियों के लिए सबक है और आम दर्शकों के लिए एक ऐसा अनुभव जो अगर उन्हें अभी समझ नहीं आया तो तय मानिए कि उनके बच्चे जरूर इसे एन्जॉय करेंगे।
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