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बाइस्कोप: कानपुर के मुशीर आलम ने ऐसे सेट किया राजेश खन्ना को, 50 साल पहले बनाई सुपरहिट फिल्म‘सफर’

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सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार का तमगा राजेश खन्ना को ऐंवई नहीं मिला। उनका स्वैग आज भी बड़े बड़े सितारों पर भारी पड़ता है। उनका गुरु कुर्ता लाखों लोगों की पसंद बना। वह पहले सितारे रहे जिनका हेयर स्टाइल युवाओं ने कॉपी किया और वह ऐसे भी पहले सितारे रहे जिनकी फोटो से लड़कियों ने शादी कर ली। वजह? मोहब्बत में हारे इंसान का जो दर्द राजेश खन्ना ने परदे पर पेश किया, उसमें उनकी जीत की दुआ करने वालों की तब कमी नहीं थी। इस हारे प्रेमी की नकल करने की कोशिशें अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक ने परदे पर खूब कीं, लेकिन इस सफर में कोई उनसे आगे न निकल सका। आज राजेश खन्ना की फिल्म ‘सफर’ को 50 साल पूरे हो रहे हैं। 

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
यहां से मिला ‘कल हो ना हो’ का आइडिया
बीमार नायक का अपनी प्रेमिका के लिए दूसरे युवक को आगे करना, बहुत बड़े दिल का काम है। शाहरुख खान को कुछ कुछ ऐसा करते आपने फिल्म ‘कल हो ना हो’ में देखा होगा। लेकिन, राजेश खन्ना की फिल्म ‘सफर’ अगर आप देख लेंगे तो आपको हिंदी सिनेमा के इस सितारे की अदाकारी का असली मतलब समझ आएगा। बहुत बाद में राजेश खन्ना ने ऐसी ही उम्दा अदाकारी फिल्म ‘आविष्कार’ में भी दिखाई। अभी बीते रविवार यानी 27 सितंबर को ही राजेश खन्ना की सुपरस्टारडम की पहली सीढ़ी बनी फिल्म ‘आराधना’ की रिलीज को 51 साल पूरे हुए हैं। इसके बाद 1971 तक राजेश खन्ना ने 15 लगातार सोलो और दो डबल हीरो वाली सुपरहिट फिल्में दीं। इन दो डबल हीरो वाली सुपरहिट फिल्मों में से एक थी शम्मी कपूर और हेमा मालिनी के साथ बनी फिल्म ‘अंदाज’, जिसमें राजेश खन्ना का सिर्फ 10 मिनट का कैमियो है और दूसरी फिल्म रही ‘सफर’ जो हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
भद्रलोक से काका का प्यार
फिल्म ‘सफर’ के बारे में बातें शुरू करने से पहले थोड़ी सी बात आज की पीढ़ी को उस दौर की भी बता देते हैं जब फिल्मों में काम करना लाखों युवाओं का सपना हुआ करता था। ऐसा सपना आज भी करोड़ों युवा देखते हैं, लेकिन तब फिल्मों में काम पाने का तरीका लोकतांत्रिक हुआ करता था। सात बड़े निर्माताओं ने हिंदी फिल्मों के लिए नए हीरो तलाशने की खातिर एक प्रतियोगिता की और इसके फाइनल में पहुंचने वाले तकरीबन सभी कलाकारों को हिंदी सिनेमा में काम, नाम और इनाम सब मिला। इस कंपटीशन में अव्वल नंबर राजेश खन्ना रहे ये तो आप जानते ही हैं, लेकिन उन दिनों भी राजेश खन्ना किसी बस या ऑटो में सफर नहीं करते थे। उस वक्त भी उनके पास हुआ करती थी एक शानदार एमजी स्पोर्ट्स कार और उस कार के मुंबई की सड़कों से गुजरते ही लोग दीवाने हो जाया करते थे। राजेश खन्ना का बंगाल प्रेम जग जाहिर है। शादी भले उन्होंने गुजराती परिवार में जन्मी डिंपल से की हो लेकिन उनका पहला प्रेम रहीं वे कहानियां जो भद्रलोक से निकलकर बाहर आईं।

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
बंगाली फिल्म ‘चलाचल’ का रीमेक
फिल्म ‘सफर’ के निर्देशक असित सेन की तरह राजेश खन्ना की पहली सुपरहिट फिल्म ‘आराधना’ के निर्देशक भी बंगाल से ताल्कुल रखने वाले शक्ति सामंत ही रहे। ‘आराधना’ से लेकर ‘हाथी मेरे साथी’ तक चले बैक टू बैक कामयाबी के इस सफर में राजेश खन्ना फिल्म ‘अंदाज’ और ‘सफर’ के अलावा ‘मर्यादा’ में राजकुमार के साथ नजर आए थे। तो इन 17 हिट फिल्मों में से सोलो और मल्टीस्टारर की गिनती थोड़ा कन्फ्यूजिंग हैं लेकिन इस लिस्ट पर चर्चा फिर कभी, आज तो बात करते हैं ढाका में जन्मे निर्देशक असित सेन की जिन्होंने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘बिप्लबी’ से ही लोगों को अपने हुनर का कायल बना दिया था। ये बात है सन 1948 की और इसके बाद असित सेन ने तीन बंगाली फिल्में ‘चलाचल’, ‘दीप ज्वेले जय’ और ‘उत्तर फाल्गुनी’ बनाईं। ‘उत्तर फाल्गुनी’ के लिए जब उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला तो हिंदी सिनेमा के लोगों का ध्यान भी उनकी तरफ गया और असित ने अपनी फिल्म ‘उत्तर फाल्गुनी’ के हिंदी रीमेक ‘ममता’ से हिंदी फिल्म जगत में कदम रख दिया। फिल्म निर्माता मुशीर आलम ने ये फिल्म देखी तो काफी प्रभावित हुए। असित सेन तब राजेश खन्ना के साथ अपनी पहली फिल्म ‘खामोशी’ बना रहे थे। इस फिल्म में हेमंत कुमार का गाया गाना ‘तुम पुकार लो..’ तो आपने सुना ही होगा। राजेश खन्ना और असित सेन का मिलन दोबारा हुआ फिल्म ‘सफर’ में और ये रीमेक थी असित सेन की पहली बंगाली फिल्म ‘चलाचल’ की।

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
तमाम हिंदी फिल्मों की प्रेरणा
अशोक कुमार, शर्मिला टैगोर, राजेश खन्ना, फिरोज खान, आई एस जौहर, अरुणा ईरानी, नादिरा के साथ तमाम चर्चित सहायक कलाकारों को लेकर बनी फिल्म ‘सफर’ का असली हीरो इसकी कहानी ही है। आशुतोष मुखर्जी की लिखी कहानी पर असित सेन ने ‘चलाचल’ के लिए जो पटकथा लिखी थी, उसी में थोड़ा फेरबदल करके उन्होंने इसे फिल्म ‘सफर’ के लिए भी प्रयोग कर लिया। हिंदी में इस फिल्म के संवाद लिखे थे इंदर राज आनंद ने। फिल्म की कहानी वैसे ही शुरू होती है जैसे बाद में सलीम जावेद ने अपनी फिल्म ‘दीवार’ की कहानी शुरू की। एक मौत के जिक्र से शुरू हुई कहानी का फ्लैशबैक ‘सफर’ की कहानी को उधर भी लेकर जाता है जिधर से होकर फिल्म ‘चांदनी’ के हीरो का सफर गुजरता है। फिल्म ‘सफर’ में ऑपरेशन थिएटर में जिंदगी और मौत से लड़ती एक जिंदगी की कहानी में प्रेम घुलता है मेडिकल कॉलेज में। 

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आज के जैसी दिखती 50 साल पुरानी कहानी
फिल्म ‘सफर’ की कहानी में नीला और अविनाश दोनों डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। शुरू की कुछ गलतफहमियों के बाद दोनों में प्रेम होता है। अविनाश गरीब है। काम करता है, पेटिंग्स बनाता है। नीला को ये देखकर अचरज होता है कि अविनाश ने उसकी खूब सारी पेंटिग्स बना रखी हैं। इस बीच नीला भी ट्यूशन पढ़ाने लगती है और जिस बच्चे को वह ट्यूशन पढ़ाने जाती है, उसके बड़े भाई शेखर का दिल नीला पर आ जाता है। शेखऱ शादी का प्रस्ताव लेकर नीला के भाई से मिलता है जो उसे अविनाश के पास भेज देता है। अविनाश को शेखर पसंद आता है। दोनों की शादी की बात भी चला देता है। नीला को अब समझ ये आता है कि अविनाश को शायद उससे प्यार ही नहीं है। कुछ और गलतफहमियां होती हैं। शेखर की मौत होती है। अविनाश गायब हो जाता है। नीला पर शेखर की मौत का इल्जाम आता है और वह गिरफ्तार हो जाती है। और, फिर एक दिन अविनाश लौट आता है।

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म में पांच गाने, हर गाना सुपरहिट
फिल्म ‘सफर’ के लिए असित सेन ने राजेश खन्ना की सिफारिश पर उस दौर के बेहतरीन तकनीशियन अपनी फिल्म में लिए थे। शालिनी शाह ने राजेश खन्ना के साथ साथ फिरोज खान के लिए भी बढ़िया ड्रेस तैयार किए और शर्मिला टैगोर की कॉस्ट्यूम डिजाइन के तो कहने की क्या। अगर फिल्म आप देखेंगे तो पाएंगे कि दरअसल ये कहानी नीला की ही है। वही इस कहानी का मुख्य आधार है। उस पर तकरीबन वैसे ही आरोप लगते हैं, जैसे अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के बाद रिया चक्रवर्ती पर लगे। वहां नीला गिरफ्तार हो जाती है, यहां रिया। बस रिया के केस में कोई लव लेटर नहीं है। कमल बोस ने अपने कैमरे के जरिए इस फिल्म में नीला का अंतर्द्वद्व बहुत ही अच्छे तरीके से कैमरे में कैद किया और फिल्म के गानों की शूटिंग भी बहुत बढ़िया की है। निर्देशक असित सेन को इसके अलावा अपने प्रिय कला निर्देशक सुधेंदु रॉय और वीडियो एडीटर तरुण दत्ता से भी काफी मदद मिली। फिल्म में संगीत है कल्याणजी आनंदजी का और इसके गाने लिखे इंदीवर ने। फिल्म में पांच गाने हैं और पांचों सुपरहिट। किशोर कुमार ने फिल्म में दो गाने गाए, ‘जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर..’ और ‘जीवन से भरी तेरी आंखे मजबूर करें जीने के लिए..’। मुकेश ने गाया ‘जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे’। मन्ना डे के हिस्से आया ‘नदिया चले चले रे धारा..’ और लता मंगेशकर ने इसी फिल्म के लिए गाया, ‘हम थे जिनके सहारे...’ 

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
असित सेन को मिला बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड
फिल्म ‘सफर’ में राजेश खन्ना ने जो बेहतरीन अभिनय किया है, उस तक पहुंचने की जो कोशिशें बाद में आने वाले सितारों ने की, उनका जिक्र मैं शुरू में ही कर चुका हूं। फिरोज खान ने इस फिल्म में ये जताने की कोशिश की कि वह न सिर्फ एक अच्छे अभिनेता हैं, बल्कि चुनौती मिले तो वह अदाकारी में किसी भी दूसरे अभिनेता के बराबर आकर खड़े हो सकते हैं। फिरोज खान के साथ दिक्कत ये रही कि उस दौर के तमाम निर्देशकों ने उन्हें सेकंड लीड हीरो के किरदार ही ज्यादा दिए। शर्मिला टैगोर की अदाकारी पर इस फिल्म में सारे दर्शकों की निगाहें टिकी रहीं और उनका नाम सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की कैटेगरी में फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामित भी हुआ। शर्मिला को इससे साल भर पहले ही फिल्म ‘आराधना’ के लिए ये पुरस्कार मिल भी चुका था। फिल्म ‘सफर’ ने इसके निर्देशक असित सेन को उस साल के पुरस्कारों में दिलाया बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड, ये अवार्ड पाने से असित सेन अपनी पिछली फिल्म ‘ममता’ में नामित होने के बाद भी चूक गए थे।

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फिल्म- सफर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
फिल्म ‘सफर’ कानपुर के मुशीर आलम और उनके दोस्त रियाज ने बतौर निर्माता मिलकर बनाई थी। मुशीर रियाज नाम का उनका प्रोडक्शन हाउस फिल्मों में दिलीप कुमार की फिल्म ‘बैराग’ से चर्चा में आया। असित सेन ही ‘बैराग’ के भी निर्देशक रहे। ये फिल्म बनने में देरी होती दिखी तो मुशीर रियाज, असित सेन और राजेश खन्ना ने मिलकर ‘सफर’ बनाने का फैसला किया। इस फिल्म का आइडिया लेकर मुशीर आलम ही पहले राजेश खन्ना से मिले थे। दोनों ने साथ बैठकर फिल्म ‘चलाचल’ देखी। राजेश खन्ना को फिल्म पसंद आ गई और इस तरह से मुशीर ने ये फिल्म शुरू की। उनके प्रोडक्शन हाउस ने आगे चलकर ‘कमांडो’, ‘राजपूत’, ‘शक्ति’ और ‘विरासत’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। फिल्म ‘सफर’ में आपको चर्चित अभिनेता सचिन और मराठी फिल्मों का बड़ा नाम महेश कोठारे भी अपने बालरूप में दिखेंगे। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)
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