फिल्म- ज्वार भाटा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
राजेंद्र कृष्ण के गीतों ने बांधा समा
फिल्म ‘ज्वार भाटा’ लिखने में ए सुब्बा राव की मदद की उस समय के चर्चित लेखक राजेंद्र कृष्ण ने। पंजाबी पृष्ठभूमि से होने की वजह से लोग उनका नाम पुकारते थे, राजिंदर क्रिशन। जी हां, वही राजेंद्र कृष्ण जिनके लिखे ‘हम प्यार में जलने वालों को..’, ‘मैं अपने आप से घबरा..’, ‘इस भरी दुनिया में..’, ‘वो दिल कहां से लाऊं..’ और ‘ये जिंदगी उसी की है..’ हिंदी सिनेमा के संगीत के स्वर्णिम युग के नायाब हीरे माने जाते हैं। राजेंद्र कृष्ण के पास शब्दों का भंडार था और एहसासों का खजाना। गुजरात के जलालपुर में 6 जून 1919 को जन्मे राजेंद्र कृष्ण ने गीत या कहानियां लिखने की कोई ट्रेनिंग नहीं ली। मैट्रिक पास करके सरकारी नौकरी करने लगे थे। बस फिराक गोरखपुरी, अहसान दानिश, सुमित्रानंदन पंत और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ को खूब पढ़ते थे। नौकरी उनकी लगी थी शिमला में और दिल उनका लगा रहता था बंबई में। और जिस साल देश आजाद हुआ, उसी साल वह भी नौकरी के मोह से आजाद हो गए। सन 1947 में ही उनकी लिखी पहली फिल्म ‘जनता’ रिलीज हुई और इसी साल उनके लिखे गाने भी पहली बार फिल्म ‘जंजीर’ में लोगों ने सुने। राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीतों का जमाना अब तक दीवाना है। ‘ज्वारा भाटा’ में लिखे उनके गीतों में से ‘तु रु रु तु रु रु रु, तेरा मेरा प्यार शुरू’, ‘रूठा है तो मना लेंगे’ और ‘दाल रोटी खाओ’ तो अब भी सुनने पर सामयिक ही लगते हैं। लक्ष्मीकांत प्यारे लाल ने इन गानों को बांधा बहुत चित्ताकर्षक धुनों में है।
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