गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘गॉडजिला वर्सेंस कॉन्ग’ अंग्रेजी के अलावा भारतीय भाषाओं में भी रिलीज हुई है। ये भी प्रकट ही है कि जो संवेदनाएं अंग्रेजी फिल्म के शौकीनों की होती हैं, उनसे हिंदी फिल्म के दर्शकों की संवेदनाएं बिल्कुल दूसरी धुरी पर हो सकती हैं। हालांकि, भाषायी फिल्मों का एक बड़ा दर्शक वर्ग ऐसा भी है जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों तरह की अच्छी फिल्मों का प्रशंसक रहा है लेकिन इस दर्शक वर्ग तक पहुंच पाने का जरिया अभी वार्नर ब्रदर्स इंडिया की मार्केटिंग टीम को सीखना बाकी है। फिल्म ‘गॉडजिला वर्सेंस कॉन्ग’ शोरगुल, अनर्गल प्रलाप और चीख पुकार वाली किसी लक्ष्यविहीन टीवी बहस की तरह है जिसमें दर्शक का समय तो खूब नष्ट होता है, लेकिन इस समय के बदले उसे कोई सुखद एहसास फिल्म खत्म होने के बाद मिल नहीं पाता है। फिल्म पूरी होने के बाद कुछ याद आता है तो वह है अब्दुल अहमद साज़ का इक शेर कि ज़िंदगी इक दूर तक संगीत थी अब शोर है, हां मगर इस शोर के बिखराव में...!