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Movie Review: कॉमेडी नहीं, कपिल शर्मा के लिए देखें 'फिरंगी'

Fri, 01 Dec 2017 02:49 PM IST
रवि बुले
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फिरंगी-दूसरा लुक
-निर्माताः कपिल शर्मा
-निर्देशकः राजीव ढींगरा
-सितारेः कपिल शर्मा, इशिता दत्ता, कुमुद मिश्रा, मोनिका गिल, इनामुलहक, एडवर्ड सोनेनबिक, अंजन श्रीवास्तव
-रेटिंग **

गोरे अंग्रेज बदमाश थे तो काले अंग्रेज यानी राजा भी कम नहीं थे। प्रजा का खून चूसने, षड्यंत्रों से उसे पिछड़ा बनाए रखने में उनका भी खूब हाथ था। निर्देशक राजीव ढींगरा की फिरंगी दोनों के असली चेहरे सामने लाती है। लेकिन चाहे-अनचाहे फिल्म में खास तौर पर देसी फिरंगी यानी राजा का कपट ज्यादा उभर कर आता है। कैसे वह अंग्रेजों का पिठ्ठू बना रहता है और अपने देशवासियों के धन पर अय्याशी करता है। फिरंगी में नएपन की तलाश निराश करेगी। अंग्रेजों के जमाने की इस कहानी में आप पाते हैं कि एक गांव का भोलाभाला जवान लड़का है मंगा (कपिल शर्मा)। कुछ कमाता-धमाता नहीं। पिता नाराज हैं क्योंकि दो बेटियों की भी शादी करनी है।
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Firangi
मंगा को अपने दोस्त की शादी में पड़ोस के गांव की लड़की (इशिता दत्ता) पसंद आ जाती है। मंगा को ईश्वर का आशीर्वाद है कि वह जिसकी कमर में लात मारता है, उसकी कमर का दर्द दुरुस्त हो जाता है। राजा चंद्रभान (कुमुद मिश्रा) के महल में अंग्रेजों के प्रतिनिधि अफसर डेनियल की कमर टेनिस खेलते हुए चोट खा जाती है और मंगा को बुलावा आता है। मंगा की लात से स्वस्थ होकर खुश डेनियल उसे अपना अर्दली बना लेता है। जब लगता है कि नौकरी मिलने से मंगा की शादी का रास्ता खुल गया तब अंग्रेजों के विरुद्ध गांधीवादी रास्ते पर चल रहे लड़की के दादा (अंजन श्रीवास्तव) अड़ जाते हैं कि फिरंगी के नौकर लड़के से पोती का ब्याह नहीं करेंगे।
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Firangi
अब मंगा क्या करे? कहानी का दूसरा ट्रेक यह है कि कैसे राजा अंग्रेज अफसर से मिलकर गांववालों की जमीन हड़पता है। जमीन गंवाने के लिए गांव वाले मंगा को दोषी मानते हैं। लगातार उलझता मंगा क्या गांव वालों का विश्वास जीत सकेगा? क्या फिरंगी और राजा को षड्यंत्रों की कीमत चुकानी पड़ेगी? फिरंगी टीम वर्क है लेकिन भरोसमंद चेहरा एकमात्र कपिल हैं। वह यहां मंगा के रूप-रंग में ढलने की कोशिश में हैं। टीवी पर लगातार चुटकुले बरसाने वाला कपिल यहां गायब है। इस लिहाज से उनके फैन्स को फिरंगी में बहुत मजा नहीं आएगा।
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Firangi
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी धीमी गति है। इसकी लंबाई के अनुपात में कहानी के उतार-चढ़ाव, रोमांच-रोमांस थके हुए हैं। राजीव ढींगरा ने स्क्रिप्ट और निर्देशन को कसा होता तो बात बनती। फिल्म के गांव के सैट और ग्रामीण परिवेश से आशुतोष गोवारिकर की लगान याद आती है। कुटिल राजा बने कुमुद मिश्रा का अभिनय बढ़िया है। अंजय श्रीवास्तव भी अपने किरदार में उभरते हैं। इशिता दत्ता सिर्फ प्रेमिका-रूप में हैं। उनके संवाद और हालात ऐसे नहीं हैं कि वह याद रह जाएं। अंग्रेज अफसर डेनियल के रूप में एडवर्ड सोनेनबिक अच्छे लगे। फिल्म का गीत-संगीत हॉल से बाहर निकलने पर याद नहीं रहता। फिरंगी में कपिल ब्रांड कॉमेडी नहीं है। अतः अगर आपके पास दो घंटे 40 मिनट का वक्त है, तभी दिल मजबूत करके इसे देखने जाएं।
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