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Fabulous Lives Of Bollywood Wives Review: बचके रहना, इतना नकली रियलिटी शो पहले कभी नहीं देखा होगा

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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला
नेटफ्लिक्स और करण जौहर के बीच कुछ तो ऐसा पका है जिसने नेटफ्लिक्स के नियमित ग्राहकों के लिए ओटीटी देखना दुश्वार करने की ठान सी रखी है। साल की शुरूआत हुई थी ‘घोस्ट स्टोरीज’ से और भगवान करे कि नेटफ्लिक्स इस साल अब करण जौहर की कंपनी के शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के बाद कुछ और न दिखाए इस साल के आखिर तक। वैसे तो शनिवार को दर्शकों के सब्र का इम्तिहान ‘कुली नंबर वन’ के ट्रेलर ने भी लिया जिसमें गोविंदा की नकल करते दिखे वरुण धवन ने फिल्म के इंतजार का सारा मजा किरकिरा कर दिया, लेकिन फिलहाल बात शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ की ही करते हैं।
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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तीन साल पहले बेलगांव के कमांडो स्कूल पर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले उत्तम डोमले ने रियलिटी शो के नाम पर एक बेहूदा सा शो बना डाला है, शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’। फिल्मी दुनिया को अगर आपने जरा भी नजदीक से देखा है तो ये शो जरूर आपको असली सा लगेगा क्योंकि इतने नकली इंसान सिर्फ एक ही इंडस्ट्री में एक साथ मिल सकते हैं। यहां हर बात का दिखावा है। पति साथ नहीं रहता तो ये डिसक्सशन प्वाइंट है। बेटी के अवार्ड शो में पिता नहीं जाता तो इस पर भी वह इतरा सकता है। किसी की बीवी अपने पति की नाकामी का दुखड़ा कैमरे पर रो सकती है तो कोई अपनी वापसी को लेकर खुद पर  भरोसा न होने का दुखड़ा रोकर भी करण जौहर से पैसे ले जा सकता है।
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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
करण जौहर ने रामगोपाल वर्मा जैसी ‘फैक्ट्री’ खोल ली है। वह बस फिल्में, टीवी शोज, ओटीटी शोज, डिजिटल फिल्में सब बनाए जा रहे हैं। खुद इनमें से कितनों पर उनका नियंत्ण रहता होगा, वह खुद नहीं जानते। उनकी कंपनी अगर जल्दी ही ‘फैक्ट्री’ की ही गति को प्राप्त हो जाए तो इसमें कोई अचरज की बात होगी नहीं क्योंकि ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ जैसे शोज न सिर्फ धर्मा प्रोडक्शंक की ब्रांडिंग पर धब्बा हैं बल्कि ऐसे शोज धर्मा की आने वाली प्रस्तुतियों पर भी भारी पड़ सकते हैं।

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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहने को रियलिटी शो की तरह बने ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के आठ एपीसोड आपको हिंदी सिनेमा के चार सितारों की पत्नियों की निजी जिंदगी और व्यावसायिक जिंदगी में झांकने का मौका देते हैं। लेकिन, फैबुलस लाइफ अगर सिर्फ महंगे घरों में रहना, हमेशा सजे धजे रहना, हर बात पर इतराना, हर दूसरी बात का दुखड़ा रोना ही है तो करण जौहर को अपनी कंपनी के नाम का मतलब फिर से समझना जरूरी है। इतनी नकली दुनिया में रहने वाले लोग किसी का आदर्श नहीं हो सकते और न ही ये जीवन किसी भी कोने से फैबुलस हो सकता है, करण जौहर को दिखता हो, ये अलग बात है।
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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नीलम कोठारी को छोड़ बाकी किसी दूसरी बॉलीवुड वाइफ को तो दर्शक ठीक से जानते भी नहीं हैं। सीमा खान खुद शो में ही कुबूल कर लेती हैं कि वह पत्नी की तरह सोहैल खान के साथ रहती भी नहीं, तो फिर शो में क्यों है भई? दर्शकों को बुद्धू बनाने के लिए? या सिर्फ अभिनेताओं की पत्नियों की एक अलग प्रजाति के बारे में बातें करने के लिए। शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ देखना किसी प्रताड़ना से कम नहीं है।
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फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ताज्जुब की बात ये है कि ऐसे शो के लिए मधुर भंडारकर बीते 15 दिन से नाम चोरी हो जाने को लेकर परेशान रहे। रियलिटी शो लोग दूसरों की बेवकूफियों पर हंसने के लिए देखते हैं लेकिन यहां तो हंसी अपने ऊपर ही इस बात पर आती है कि रिव्यू के लिए ये शो समीक्षकों को तो आखिर तक देखना ही होगा। शो का आइडिया ‘फोर मोर शॉट्स’ से मारा हुआ लगता है, ओरीजनल कुछ तो अब वैसी भी करण जौहर की कंपनी में कम ही बनता है।

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